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Ishhoo Exclusive Lockdown diary Satire/ Hasya Vyang Story

शादी और लॉकडाउन (Shaadi aur Lockdown) Ch-1

पार्ट 1- परम की शादी :

“लॉकडाउन में शादी” या “लॉकडाउन के बाद शादी” तो सभी सोचते होंगे, आज की कहानी एक ऐसे जोड़े की जिनकी शादी तो लॉकडाउन से पहले हुई पर पगफेरे से पहले लॉकडाउन लग गया…..। आइये लॉकडाउन के मारे नव दम्पति के हालात का जायज़ा लेते हैं, और साथ में मुस्कराते हैं….   

हर नए जोड़े की तरह परम भी बहुत खुश था, आज उसकी शादी जो थी | कितनी सारी तैयारियां, कितने सारे ख्वाब….आज सब सच होने जा रहा था | परिवार का दूसरे नंबर का बेटा था और पढने में सबसे होशियार | पहले दसवीं में 76%, बारहवीं में 74%, ग्रेजुएशन में भी फर्स्ट क्लास फिर बैंक की तैयारी | नौकरी लगी भी तो अपने ही शहर के सहकारी बैंक में | नौकरी में जम के मेहनत की और साहब अस्सिस्टेंट मेनेजर भी बन गए | तब कहीं जा के माँ – बाप को शादी की सूझी| प्रोफाइल बनाई गयी, शहर के नामी फोटोग्राफर से तीन अलग अलग पोज़ में फोटो भी खिच गयी और लगे हाथ सभी मेट्रिमोनियल साईट पर अपलोड भी कर दी गयी | इधर रिश्तेदारों में फ़ोन भी चला गया कि, कोई सुन्दर सुशील कन्या हो तो परम के लिए बताना | परम मेधावी था, संस्कारी था और ठीक ठाक नौकरी भी थी, सो सभी भाभियों, चाचीयों, मामीयों ने ख़ासा इन्ट्रेस्ट दिखाया और मायका खंगाला जाने लगा|

मेट्रिमोनियल साईट से भी अच्छा खासा रिस्पांस आया और किस्मत से एक कन्या के 19 गुण मिले और प्रोफाइल भी | नाम था कविता | सब कुछ वैसा जैसा परिवार वाले चाहते थे और परम ख्वाबों में देखा करते | जल्द ही मुह-दिखाई, रोका और फिर शादी की तारीख भी तय हो गयी | कविता एक स्कूल में एडमिशन इंचार्ज थी और हर लड़की की तरह उसने भी शादी के ढेरों ख्वाब देख रखे थे | शुरू शुरू में तो दोनों हिचकिचाए फिर तो घंटों घंटों फ़ोन पर बातें होने लगी| बारात की थीम, रिसेप्शन की ड्रेस, विदाई के कपड़े सब कुछ व्हाट्सएप पर एक्सचेंज होने लगे | “शादी के बाद घूमने कहाँ जाए ?” इस सवाल पर घंटों मंथन हुआ, कविता को समुंदर देखना था और परम को हिल स्टेशन | लद्दाख, शिमला, मनाली, गोवा, अंडमान, रोज़ एक डेस्टिनेशन और रोज़ ZEE टीवी की तरह, “ताल ठोक के” | झक मार के वही किया जो सब करते है, फाइनल हुआ केरल चलेंगे, “God’s own country” | हिल स्टेशन भी हो जायेगा और समुंदर भी, जो नहीं मिलेगा वो थी बरफ़…. कोई बात नहीं फिर कभी देख लेंगे……बहुत याद आई तो दोनों मिया बीवी फ्रीज़र खोल के दो-तीन मिनट खड़े हो जायेंगे, एहसास तो मिल ही जाएगा |

सारे टिकट, होटल बुक हो रखे थे, और परम अब फूलों से सजी कार में बैठे बारात घर की ओर अग्रसर थे| पिता जी चलती बारात में दोस्तों के बीच दो दो घूंट लगा रहे थे, दिल में यही फीलिंग थी कि “आखरी बेटे की शादी है अब नही तो कब?”, और बड़े भाई साहब दोस्तों के बहकावें में कि, “अबे! छोटे भाई की शादी है आज तो जम के पियेंगे और झूम के नाचेंगे”| पता दोनों को था लेकिन मजाल है जो एक दूसरे से नज़र मिल जाए|

खैर सब वैसा ही हुआ जैसा एक मिडिल क्लास शादी में होता है, बैंड वाले से झगड़ा, खाने को ले कर चिक-चिक, जूता छुपाई में लात घूसा, पर शादी ठीक ठाक हो गई| सुबह विदा करा के परम, कविता को घर भी ले आया, सब खुश थे | कविता को भी एक बड़ा परिवार मिल गया था सास-ससुर,एक जेठ-जेठानी, और एक भतीजा समीर|

घूमने का प्लान कुछ दिन बाद का था, एक तो टिकट नहीं मिल रही थी दूसरा शादी ब्याह के घर में रिश्तेदार होते है तो अचानक की घूमने चले जाना अच्छा नहीं लगता|                                              

कुछ ही दिन बीते थे कि मायके से फ़ोन आ गया, “पग फेरे की रस्म कर लेते है, एक बार कविता और दामाद जी घर आ जाएँ फिर सब निश्चिंत, जहाँ जाना है जाओ|” तय हुआ की परम और कविता जायेंगे, परम दो-तीन दिन रह कर वापस आ जायेंगे फिर दस दिन बाद कविता भी ससुराल आ जाएगी| तत्काल में टिकट कराया गया, भले ही पैसे ज्यादा लगे लेकिन कन्फर्म टिकट मिल गया| परम पहली बार अपने ससुराल गए थे सो आवभगत भी खूब हुई, सभी रिश्तेदार बुला बुला कर घर ले गए| करते कराते तीन दिन बीत गए और परम की ट्रेन का समय हो चला| आज परम की हालत विदा होती बेटी सी थी, बस फ़र्क इतना था कि दहाड़ मार के रो नहीं सकते थे| तभी ट्रेन की सीटी बजी और ट्रेन नें हल्का झटका दिया, पूरी भरी ट्रेन अचानक से खाली खाली सि हो गयी| जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढती, परम की हालत डीडीएलजे के शाहरुख़ खान सी होती जाती, लगता अभी भागती हुई आयेगी और वो हाथ बढ़ा कर पकड़ लेगा| देखते ही देखते ट्रेन प्लेटफार्म पार कर गयी पर सिमरन ना आई|

पहली पहली ससुराल यात्रा थी तो आवभगत में कोई कमी न हुई, एक सूटकेस ले कर गए थे, अब एक सूटकेस, एक बैग और दो कार्टन साथ में था, सेट करते-करते रात हो गयी| खाना खाने के बाद जैसे ही सीट पर लेटे, व्हाट्सएप का सिलसिला शुरू| पहले गूगल से शायरी कॉपी करते फिर वही आगे चिपका देते, दोनों तरफ से यही चल रहा था|

One reply on “शादी और लॉकडाउन (Shaadi aur Lockdown) Ch-1”

वाह भाई वाह। आप मार्केटिंग अच्छी करते थे आप इंसान अच्छे हैं यह लेखक अच्छे हैं यह आज पता चला है।
अत्यंत के दिलचस्प प्रस्तुति है यह कृपया करके ऐसे ही कुछ प्रस्तुति और और प्रयास करें।
आपका मित्र मलय

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