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Kids Story: Argani ke Yaar/ अरगनी के यार (पार्ट 1)

मेकअप (Makeup)

पीहू कान पकड़े दीवार के पास खड़ी जोर- जोर से टेसुएं बहा रही थी, उधर मम्मी का गुस्सा था की शांत ही नहीं हो रहा था| होता भी कैसे, सात सौ रुपये की लिपस्टिक पूरी सत्यानाश जो हो चुकी थी| वैसे ये वाकया कोई पहला नहीं था, मम्मी की मेकअप किट पर भरपूर नज़र रहती थी पीहू की, ज़रा सी चूक हो तो क्या काज़ल, क्या लिपस्टिक| पांच साल की पीहू ने मानों मेकअप का पूरा कोर्स कर रखा हो| करे भी क्या बेचारी, अकेली जान, स्कूल के दोस्त स्कूल में और मोहल्ले के दोस्त पार्क में, बाकी सारा दिन बस वो और उसके खिलौने| खिलौनों का तो खासा शौक था, बचपन से ले कर अब तक जितने भी खिलौने मिले सभी इकठ्ठा कर रखे थे| हालत यह थी की, अलमारी खोलो तो तीन चार तो ऐसे ही गिर पड़ते थे| वैसे तो पीहू को सारे ही खिलौने पसंद थे, पर खासा लगाव था सॉफ्ट टॉय से, रुई से मुलायम, मखमल से नरम सॉफ्ट टॉय| हर जन्मदिन, हर त्योहार एक ही फ़रियाद, सॉफ्ट टॉय चाहिए| टेडी बेयर, डॉल, बन्दर, कुत्ता, हाथी, खरगोश, पूरी जमात थी सॉफ्ट टॉय की, वो भी एक नहीं कई| बस फिर क्या पीहू, उसके सॉफ्ट टॉय और मम्मी की मेकअप किट, जब भी मम्मी चूकती, लिपस्टिक गायब और उसका रंग कभी हाथी पर तो कभी बन्दर पर| अब तो हालत यह थी की खिलौने भी अपनी असली शक्ल भूल चुके थे, बन्दर भी बंदरिया लगता था और टेडी बेयर भी| धूल और मेकअप लगते लगभग सभी खिलौने सुस्त पड़ चुके थे, न रौनक थी, न वो पहले जैसी मुस्कान, फिर भी पीहू का प्यार कम नहीं हुआ था| जितना ज्यादा प्यार उतना ज्यादा रंग रोगन|

आज की डांट उसी कड़ी का ताज़ा हिस्सा थी| रोज सी डपट होती तो पीहू एक कान से सुनती और दुसरे से निकाल देती, पर गंगा जमुना बहाने का कारण था मम्मी की दहाड़, कि, “आज तुम्हारे सारे खिलौने रद्दी वाले को दे देंगे| पूरे खिलौनों का सत्यानाश कर दिया है, और मेरी इतनी महंगी लिपस्टिक पूरी बर्बाद कर दी|”

पीहू के खिलौने कोई उससे अलग कर दे ऐसा हो सकता था भला, पर आज का गुस्सा अलग था, मम्मी ने बोल दिया था| पीहू ने उम्मीद भरी आँखों से पापा को देखा पर बोली कुछ नहीं| पापा भी चुप रहे, लड़ाई बेटी के फेवरेट खिलौने और मम्मी की फेवरेट लिपस्टिक के बीच थी, फ़िलहाल के लिए चुप रहना ही सबसे बेहतरीन हल था| तीनों ने चुपचाप खाना खाया और अपने- अपने रास्ते चल दिए, मम्मी किचन की ओर, पापा बालकनी की ओर और पीहू बोझिल क़दमों से अपने कमरे की ओर| बेचारी रोता सा चेहरा लिए अपने खिलौनों को ऐसे देख रही थी, मानो कह रही हो, “कल सन्डे है, सुबह ही रद्दीवाला आएगा, सारे खिलौने ले जाएगा”| खिलौने थोड़े तो परेशान थे पर धूल, मिटटी और मेकअप के रंगों में इतना सराबोर थे कि दिमाग काम नहीं कर रहा था, बोले कुछ नहीं, चुपचाप उदास पड़े रहे|

पीहू कुछ सोच कर उठी और दबे पाँव बालकनी पहुँच गयी, बखूबी जानती थी काम कैसे मनवाया जाता है, पापा नाराज़ तो मम्मी को पटा लो और मम्मी नाराज़ तो पापा को, मतलब तो काम होने से है| धीरे से पापा का कुर्ता खींचते हुए बोली, “पापा, मम्मी को बोलो न प्लीज, मेरे खिलौने…..” पापा पूरी कहानी जानते थे सो मन ही मन मुस्कराए पर चेहरे पर मुस्कराहट न आने दी, चिंता वाली लकीरें लाते हुए बोले, “बेटा, आपने अपने खिलौनों को देखा है? वो आपके कमरे में जो अलबम रखा है ज़रा देखो, पहले कैसे दिखते थे और अब……| ऊपर से मम्मी की सारी मेकअप किट…. जानती हो मम्मी कितनी गुस्सा हैं…|” पीहू के पास दूसरा कोई उपाय नहीं था, जानती थी बस हाँ में हाँ मिलते रहो, काम अपने आप बन जाएगा| बस रुआंसे मुह से सर ऊपर नीचे हिलती रही और, “हाँ पापा, यस पापा” करती रही|

मम्मी का गुस्सा अब थोड़ा शांत था, वह चुपचाप बालकनी के दरवाज़े पर टिकी सारा कार्यक्रम देख रहीं थी, जानती थी कि सब नाटक है, पर अन्दर से पिघल चुकी थी| पापा की तरह सख्त चेहरा बनाते हुई आई और बोली, “कुछ नहीं, कोई एक्सक्यूज़ नहीं, अब सारे खिलौने कबाड़ी को जाएंगे”, पर कहते- कहते चेहरे का भाव उतना सख्त न रख पाई, और आँखों में हल्की मुस्कान दिखने लगी|

पीहू जानती थी यही समय है ब्रम्हास्त्र चलाने का….., दो आंसू टपकाए, ठोड़ी को सख्त किया, होंठों को रुआंसी मुद्रा में लाई और बुदबुदाते हुए बोली, “मम्मी प्लीज, आज के बाद फिर कभी नहीं छुऊँगी, प्रॉमिस….., पापा प्लीज, मम्मी को बोलो ना…..”

पापा ने मम्मी को देखा और साधारण चेहरा रखते हुए बोले, “भई, मान जाओ, अब पीहू दोबारा ऐसा नहीं करेगी”| पीहू जानती थी, पापा की बात के वज़न में अपनी बात का वज़न जोड़ दें तो काम बनता ही बनता था| जोर से बोली, “मम्मी प्रॉमिस!, आज से कभी भी आप की लिपस्टिक नहीं छुऊँगी| पक्का प्रॉमिस|” मम्मी थोड़ा सख्त चेहरा बनाते हुए बोलीं, “और एक बात, आज के बाद किसी भी खिलौने का मेकअप नहीं करोगी, न लिपस्टिक, न काज़ल, न कलर, बोलो प्रॉमिस?” पीहू जानती थी, खिलौनों को बचाना है तो हाँ बोलना ही होगा| पहले भी कितनी ही बार हाँ बोल कर साफ़ बच निकली थी| बोली, “हाँ मम्मी, प्रॉमिस! आज के बाद किसी भी खिलौने का मेकअप नहीं करुँगी|”

यह क्या? पीहू के शब्द जैसे ही निकले, अधमरे से खिलौनों में मानो हल्की जी जान लौटी हो| “क्या! आज के बाद हमारी रंगाई पोताई बंद…” बन्दर बोला| तभी हाथी बोला, “तुम्हे क्या, तुम तो फिर भी बन्दर से बंदरिया हुए हो, हमे देखो अच्छे खासे हाथी हो रंग पोत कर बंदरिया बना दिया”| बन्दर को गुस्सा तो आया पर जानता था, भले खिलौना ही हो पर हाथी से भिड़ना भारी पड़ सकता है| बोला कुछ नहीं बस मुहं फेर कर चुपचाप बैठ गया|

उधर पापा ने माहौल शांत होता देख कहा, “पीहू कल सन्डे है, क्यों न हम सब मिल कर तुम्हारे खिलौनों को नहला धुला कर साफ़ कर दें|” बेचारी मन ही मन सोच रही थी, अच्छा खासा मेकअप ख़राब हो जाएगा, इतनी सारी मेहनत सब बर्बाद जाएगी| पर खिलौनों को रद्दीवाले से बचाना है तो हाँ तो बोलना ही होगा| “ठीक है पापा, कल हम सब मिल कर इन सब खिलौनों को नहलाएंगे|” इतना बोल कर पीहू अपने कमरे को बढ़ चली| 

उधर कमरे में सुगबुगाहट तेज़ हो गयी थी, “क्या वाकई हम सब पहले वाला चेहरा देख पाएंगे?, कैसे नहलायेंगे हमें?, कहीं ठण्ड तो नहीं लग जाएगी?” हर कोई दबी आवाज़ में यही सवाल पूछ रहा था|

आगे का भाग अगली कहानी में : खरगोश की आँखhttps://ishhoo.co.in/2020/07/28/kids-toy-story-argani-ke-yaar-2/

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