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Dakshin Africa ki Lok Kathayen -1(ज़ुलु लोक कथाएं-1)

ज़ुलु सभ्यता, दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी एवं प्राचीन सभ्यता है| ज़ुलु सभ्यता के लोग मानते हैं कि वह स्वर्ग से आए हैं| ज़ुलु अपने रीड नृत्य (REED DANCE)और मनका-कारी (BEAD WORK)  के लिए भी प्रसिद्ध हैं|

ज़ुलु लोक कथाएं, मनोरंजन और नैतिक ज्ञान के लिए आज भी प्रसिद्ध हैं, ये कथाएं आम जिंदिगी से जुड़ी हैं| इन कथाओं में जानवर, पेड़- पौधों और उनकी अलौकिक ताकतों का वर्णन होता है| इन कहानियों का उद्देश्य अपनी प्रजाति के लोगों का मनोरंजन और उनकी जानकारी बढ़ाना और उन्हें नैतिकता की सीख देना होता है | बच्चों और पूरे परिवार के मनोरंजन के लिए यह लोक कथा हिंदी में प्रस्तुत कर रहा हूँ….

कहानी – जाबु और शेर– दक्षिण अफ्रीका की ज़ुलु लोक कथा)

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में जाबु नाम का छोटा चरवाहा रहता था| छोटी सी  उम्र में जिस तरह से उसने अपने पिता की भेड़-बकरियों को संभाला था इससे उसकी समझदारी का पता चलता था| उसके पिता के पास बहुत सी भेड़ – बकरियां थीं, इन जानवरों को खेतों और व्यस्त पगडंडियों पर संभालना भी एक बड़ा काम था|  जाबु के दोस्तों के पास भी मवेशी थे पर जाबु से लगभग आधे, फिर भी मवेशियों का जितना ख्याल जाबु रखता था उतना कोई नहीं रख पाता था| इस बात का जाबु के पिता को बहुत गर्व था की एक छोटा बच्चा इतने सारे भेड़ – बकरियों को कितने अच्छे से संभाल लेता है|

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एक दिन जाबु टीले पर बैठा अपनी भेड़ों को चरते देख रहा था और लम्बी घास में मनके पिरो कर अपनी बहन के लिए कंगन बना रहा था, तभी उसका दोस्त सीपोह भागता हुआ आया| “दोस्त तुमने खबर सुनी क्या?” सीपोह हांफते हुए बोला| इससे पहले की जाबु कुछ बोलता सीपोह बोला, “अपने गाँव के आस- पास बुबेशी शेर दिखा है| कल रात बुबेशी ने थाबू के पिता की भेड़ पर हमला किया और उसे मार दिया| गाँव के लोग उस दरिन्दे को पकड़ने के लिए जाल बिछा रहे हैं|”

जाबु को आश्चर्य न हुआ, उसने शेर के पंजों के निशान, उसकी छाप और शिकार के इधर- उधर पड़े अवशेष पहले भी देखे हुए थे| जाबु जंगल के राजा का सम्मान करता था| उसे बुबेशी के शिकार करने का तरीका पता था, वह जानता था कि बुबेशी उन जानवरों को ही मारता है जो रात में बाड़े के बाहर होते हैं| उसे लगा की गाँव वालों को सचेत करने की ज़रूरत नहीं है| “मेरे ख्याल से….” जाबु मन में बोला, “ज़रूर थाबू ने भेड़ को बाड़े के बाहर छोड़ दिया होगा|” सभी जानते थे कि थाबू लापरवाह था, हमेशा इधर-उधर की सोचता रहता था, पहले भी एक दो भेड़ों को छोड़ चुका था|

सीपोह बोला, “आओ दोस्त चलते हैं, भेड़ों को वापस ले चलते हैं, फिर जहाँ जाल बिछाया है वहां देखने चलेंगे|” जाबु ने सीपोह को देखा और मुस्कराते हुए बोला, “दोस्त, मैं भेड़ों को इतनी जल्दी बाड़े में नहीं छोड़ सकता, भेड़ों ने अभी अच्छे से घास भी नहीं खाई है|”

सीपोह हंसा और बोला, “मुझे पता था तुम यही बोलेगे, फिर भी मैं तुम्हें बताना चाहता था| चलो चलता हूँ, शायद रात में मिलेंगे|” यह बोल कर सीपोह गाँव की ओर भागा|

जाबु ने छड़ी घुमाई, जोर से सीटी बजाई और सभी भेड़ों को इकठ्ठा करने लगा| भेड़ों ने आवाज़ सुनी तो धीरे- धीरे जाबु के पास आने लगीं| जाबु मुस्कराते हुए भेड़ों को नदी किनारे ले जाने लगा| जब तक भेड़ें नदी से पानी पी रहीं थीं, जाबु ठन्डे पानी में पैर डाले बैठा रहा| दिन बहुत सुहावना था, अगर वह शेर और जाल के बारे में नहीं सोच रहा होता, तो शायद नदी की मिट्टी से अपने भाई के लिए छोटे- छोटे खिलौने बनाता| तभी जाबु ने एक दहाड़ सुनी, उसका दिल दहल गया| “गर्रर्रर्र……” , फिर एक और दहाड़| सारी भेड़े ठिठक गयीं, उनके दिमाग में जंगली जानवर की अजीब से तस्वीर उभरने लगी|

“गर्रर्रर्र……” , यह तो बुबेशी की आवाज़ थी, वह भी करीब से आ रही थी| जाबु के पास इतना भी समय नहीं था की वह जानवरों को वापस गाँव ले जा पाता, शेर बहुत नजदीक था| जाबु धीरे से उठा, छड़ी उठाई और सतर्कता से चारो ओर देखते हुए भेड़ों को इकठ्ठा करने लगा| भेड़ों को जाबु पर भरोसा था सो जैसा जाबु ने बोला भेड़ों ने वैसा ही किया, सब एक झुण्ड में जमा हो गईं|   

“गर्रर्रर्र……” , जाबु ने फिर बुबेशी की आव़ाज सुनी, पर आवाज़ में उतनी दहाड़ नहीं थी, ऐसा लगा मानों शेर परेशान था| अब जाबु का डर कुछ कम हुआ, उसने छड़ी उठाई और आवाज़ की दिशा में चल दिया|

वाकई शेर परेशानी में था, जाबु ने देखा, बुबेशी गाँव वालों के जाल में जकड़ा हुआ था, और जितना निकलने की कोशिश करता, उतना और जकड़ता जाता| उसने कभी भी जंगल के राजा को नहीं देखा था, वाकई बेहद शानदार था| शेर ने बच्चे को देखा तो बोला, “सुनो बच्चे, अच्छा हुआ तुम यहाँ हो, मेरी मदद करो| मैं इस पिंजड़े में फंस गया हूँ और निकल नहीं पा रहा हूँ| बच्चे यहाँ आओ, मेरा सर इस पिंजड़े से निकालो|” जाबु ने बुबेशी की आँखों में देखा पर उसे समझ न आया, लेकिन उसकी आवाज़ में मायूसी साफ़ झलक रही थी| “प्यारे बच्चे सुनो, इससे पहले की शिकारी आकर मुझे पकड़ें और मार दें, मुझे आज़ाद करा दो|”

जाबु दयालु था पर बेवकूफ नहीं था, “मैं तो तुम्हे आज़ाद करना चाहता हूँ बुबेशी, पर जानता हूँ, जैसे ही तुम छूटोगे, मुझे खा जाओगे|”

“नहीं नहीं मेरे दोस्त, में कभी भी उसे नहीं खा सकता, जिसने मुझे आज़ाद किया हो, मैं वादा करता हूँ, मैं तुम्हारा एक बाल भी नहीं छुऊँगा |”

शेर इतने दुःख में गिड़गिड़ाया कि जाबु को उस पर तरस आ गया, और उसने उसे छुड़ाने का निर्णय किया| वह पिंजड़े पर चढ़ा और ज़ोर लगा कर दरवाज़ा खोल दिया| एक झटके में शेर बाहर आ गया, अपना सर झटकते हुए बोला, “शुक्रिया प्यारे बच्चे, मैं तुम्हारा अहसानमंद हूँ| मेरा सर इतनी जोर से फंसा था कि मुझे लगा की शिकारी आयेंगे और मेरा सर अलग कर देंगे| प्यारे बच्चे, एक और बात, मुझे ज़ोरों की प्यास लगी है, क्या तुम मुझे नदी का रास्ता बता सकते हो? मैं रास्ता भटक गया हूँ|”

जाबु उसको भेड़ों से दूर नदी के किनारे ले गया, जानता था की बुबेशी ने उसे ना खाने का वचन दिया है, भेड़ों को नहीं| बुबेशी जब पानी पी रहा था तो एक आँख से जाबु को भी देख रहा था| मन ही मन बोला, “क्या अच्छे पैर हैं और कितने अच्छे हाथ, इतने मज़ेदार खाने को क्यों बर्बाद करना|” जैसे ही शेर ने अपना सर उठाया उसकी दोनों आँखे जाबु की ओर थीं, जाबु को समझते देर न लगी और वह पीछे हटने लगा|

“तुमने वादा किया था”, जाबु बोला| “मैंने शिकारियों से तुम्हारी जान बचाई है बुबेशी, और तुमने वादा किया था कि तुम मुझे नहीं खाओगे|”

“सही कहा” बुबेशी बच्चे की ओर आते हुए बोला| “सही बात है, मैंने वादा किया था, पर अब मैं आज़ाद हूँ, तो वायदे का कोई मोल नहीं, वैसे भी मैं बहुत भूखा हूँ|”

“तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो”, जाबु बोला| “जानते हो, अगर तुम वादा तोड़ोगे तो वादे के टूटे हुए टुकड़े आएंगे और तुम्हे चुभ जाएंगे|”

शेर थोड़ा रुका और ज़ोर से हँसते हुए बोला, “क्या बकवास है, जो चीज़ दिखती नहीं है वो भला चुभेगी कैसे? अब तो मुझे तुम्हे और ज्यादा खाने का मन कर रहा है बच्चे|”  और जाबु की ओर बढ़ते हुए बोला, “जितनी ज्यादा हम बातें कर रहे हैं, उतनी मेरी भूख बढ़ती जा रही है|”

तभी रास्ते से एक बूढ़ा गधा गुज़र रहा था| “इस गधे से पूछ लो….”, जाबु बोला| “पूछो इससे वादा तोड़ना कितनी बुरी बात है, यह तुम्हे बताएगा|”

“ठीक है तुम ज़बरदस्ती बात को खींच रहे हो बच्चे”, शेर बोला| शेर बूढ़े गधे की ओर मुड़ा और बोला, “मैं इस बच्चे को खाना चाहता हूँ, इसमें कोई परेशानी तो नहीं?” तभी जाबु बोला, “लेकिन मैंने इसे बचाया था, और इसने वादा किया था कि यह मुझे नहीं खायेगा|”

गधे ने पहले शेर को देखा फिर जाबु को, और बोला, “पूरी जिंदगी इन बेवकूफ इंसानों ने मुझे पीटा और सामान ढुलाया है, और जब में बूढ़ा हो गया तो मरने की लिए मुझे अकेला जंगल में छोड़ दिया| मुझे इंसान वैसे भी नहीं पसंद हैं” फिर शेर की ओर देखते हुए बोला, “खा जाओ इसे|” और आगे बढ़ गया|

शेर जैसे ही जाबु को खाने की लिए आगे बढ़ा, एक सियार रास्ते में आ गया, बोला, “माफ़ कीजियेगा, मैं आप के रास्ते में आ गया|”

“नहीं- नहीं तुम सही समय पर आये हो|” जाबु लपक कर बोला| “बताओ इसे, वादा तोड़ना कितनी बुरी बात है|’

“वादे की बात….वैसे यह वादे पर निर्भर करता है, सही है की नहीं? वैसे किसने किसे क्या वादा किया था?” सियार बोला| शेर बैठा और आसमान की ओर देखने लगा| उधर जाबु ने सारी कहानी सियार को कह सुनाई, कैसे उसने शेर को पिंजड़े से बचाया और कैसे शेर ने उसे न खाने का वचन दिया था|

“क्या बकवास कहानी है, हमारे महान राजा बुबेशी इंसानों के बने छोटे से पिंजड़े में फंस गए थे, मैं नहीं मान सकता” सियार बोला| बुबेशी बोला, “सच है, पिंजड़ा बहुत मज़बूत था|” सियार बोला “अरे! मैं मान ही नहीं सकता कि मेरे बहादुर राजा से भी ताकतवर कोई चीज़ हो सकती है, मुझे एक बार उस पिंजड़े को देखना है|”

शेर जाबु को अपनी आँखों के सामने रखते हुए सियार को पिंजड़े के पास ले गया| “हो ही नहीं सकता कि मेरे महान राजा का सर इस छोटे से पिंजड़े में फंस जाए, मैं मान ही नहीं सकता|” यह कहते हुए सियार फिर बोला, “महाराज! क्या आप अपना सर यहाँ ला सकते हैं, मुझे देखना है, एक छोटे से पिंजड़े में इतने बड़े राजा का सर कैसे फंस सकता है?”

“ओह्ह…तुम मुझे अपने सवालों से परेशान कर रहे हो”, शेर बोला| “यह आखिरी बार है जो मैं तुम्हारी बात सुन रहा हूँ, इसके बाद तुम चुपचाप यहाँ से चले जाना, मुझे शांति से अपना शिकार खाने देना|” सियार को दिखाने की लिए शेर ने अपना सर वैसे ही रख दिया जैसे पहले फंसा था, सियार से बिना देर किए झट से दरवाज़ा बंद कर दिया, और शेर अटक गया|

“अब मुझे समझ आया की आप कैसे फंसे होंगे, और देखो आप फिर से फंस गए महाराज और बच्चा  सच ही कह रहा था, तोड़े हुए वादे हमेशा पीछा करते हैं”, सियार बोला|

शेर गुस्से से ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ा पर वह पूरी तरह से फंस चुका था| जाबु ने सियार का धन्यवाद किया और भागता हुआ अपनी भेड़ों के पास पहुंच गया, जो सारा तमाशा चुपचाप खड़ी देख रहीं थीं|

जाबु घर पंहुचा और उसने भेड़ों को बाड़े में छोड़ दिया, वाकई क्या दिन था| तभी पीछे से सीपोह दौड़ता हुआ आया, बोला, “जाबु, नदी के पास शेर पकड़ा गया, काश तुम और तुम्हारी भेड़ें यह देख पाते|”

जाबु अपने दोस्त कि ओर मुड़ा और बोला, “आज के लिए जितना देखना था हम देख चुके|” सिपोह को कुछ भी पता नहीं था, वह पीछे मुड़ा और गाँव वालों से शेर पकड़े जाने की कहानी सुनने चल पड़ा| जाबु ने भी हँसते हुए अपनी माँ को देखा और खाना खाने बैठ गया|  

सीख: अपना वादा कभी न तोड़ो

हिंदी रूपांतरण: स्वप्निल श्रीवास्तव (इशू)

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