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Dakshin Africa ki Lok Kathayen -2(ज़ुलु लोक कथाएं-2)

चीते के गाल पर धब्बे क्यों होते हैं? (Why The Cheetah’s Cheeks Are Stained?)-दक्षिण अफ्रीका की लोक कथा

बहुत समय पहले की बात है, जंगल में एक आलसी और बेईमान शिकारी पेड़ की छांव में बैठा था| वह सोच रहा था कि, इतनी गरमी में झाड़ियों में छुप कर शिकार का इंतजार करना कितना कठिन काम है| पास ही झाड़ियों में एक तंदरुस्त हिरन घास चर रहा था, पर शिकारी इतना आलसी था कि वह उसका शिकार करने भी न उठ सका| बस बैठा – बैठा सोचता रहा कि हिरनों के झुंड में से कोई हिरन खाने को मिल जाए तो कितना मज़ा आए| तभी दूर कहीं झाड़ियों में कुछ हलचल हुई, शिकारी को वहां एक मादा चीता दिखाई पड़ी| चीते ने कुशलता से एक नादान हिरन को अपने झुंड से अलग किया, और उसको पकड़ने के लिए दौड़ पड़ी| बेहद फुर्ती और तेज़ रफ़्तार से उसने हिरन को हरा दिया और मार गिराया| जैसे ही चीते ने हिरन को मारा, पूरा झुंड बिदक गया और भाग खड़ा हुआ|

शिकारी ने देखा कि मादा चीता अपना शिकार मुहं में दबाए एक झाड़ी में चली गई| झाड़ियों में चीते के तीन छोटे-छोटे बच्चे उसका इंतज़ार कर रहे थे| शिकारी को बहुत ईर्ष्या हुई और वह मन ही मन सोचने लगा कि, काश उसके पास भी चीते जैसा शिकारी होता जो उसके लिए शिकार पकड़ता| सोचो कितना अच्छा हो कि हर रोज़ स्वादिष्ट मांस खाने को मिले, वह भी बिना मेहनत| तभी उसके दिमाग में एक चालाकी भरा विचार आया कि वह चीते के एक बच्चे को चुरा लेगा और उसे अपने लिए शिकार करने योग्य बनाएगा| उसने सोचा जब मादा चीता शाम पानी पीने तालाब पर जायेगी तभी वह चुपके से एक बच्चे को चुरा लेगा| यह सोच वह मन ही मन मुस्कराने लगा|

शाम जब सूरज ढलने लगा तब मादा चीता ने अपने बच्चों को छिपाया और पानी पीने तालाब की ओर चल पड़ी| शिकारी ने अपना भाला उठाया और दबे पांव उस झाड़ी तक पहुच गया जहाँ चीते के बच्चे छुपे थे| उसने वहां चीते के तीन छोटे- छोटे बच्चों को देखा, वह इतने छोटे थे की न तो शिकारी को डरा सकते थे, न खुद भाग सकते थे| शिकारी कुछ देर यह सोचता रहा कि किस बच्चे को चुराए, पर जब निर्णय न कर पाया तो तीनों बच्चों को ही चुरा ले गया| उसने सोचा एक शिकारी चीते से बेहतर है तीन शिकारी चीते|

जब मादा चीता लौट कर आई तो उसने पाया कि उसके प्यारे बच्चे गायब थे, वह दुखी हो गई और लगातार रोती रही| बेचारी इतना रोई कि उसके गाल पर गहरे काले धब्बे बन गए| वह पूरी रात और अगला पूरा दिन रोती रही| वह बेचारी इतना ज़ोर- ज़ोर से रो रही थी कि एक बूढ़े आदमी ने उसकी आवाज़ सुनी और वह देखने चला आया कि यह रोने कि आवाज़ कहाँ से आ रही है|

बूढ़ा आदमी बुद्धिमान था, जब उसे पता चला कि यह उस दुष्ट शिकारी की चाल है तो वह बहुत नाराज़ हुआ| आलसी शिकारी ने न सिर्फ चोरी की थी बल्कि कबीले की परंपरा भी तोड़ी थी| परंपरा के मुताबिक किसी भी शिकारी को अपनी ताकत के अनुसार ही शिकार करना था| यदि कोई इस परंपरा के ख़िलाफ़ जाता तो उसे कबीले का घोर अपमान माना जाता था|

बूढ़े आदमी ने गाँव आ कर सभी बड़ों और बुजुर्गों को इस घटना के बारे में बताया| उन्होंने उस आलसी और दुष्ट शिकारी को ढूँढ निकाला और गाँव के बाहर निकाल दिया| बूढ़ा आदमी तीनों बच्चों को उनकी माँ के पास छोड़ आया| मादा चीता बहुत खुश हुई लेकिन इतना रोने के कारण जो निशान उसके गाल पर पड़े वह कभी मिटे ही नहीं| आज भी चीते उस दुष्ट शिकारी की याद में वैसा ही निशान अपने गाल पर रखते हैं, जिसने बेईमानी से अपने कबीले की परंपरा तोड़ी थी|

सीख: (1): हमेशा अपनी परंपरा का सम्मान करो| (2): कभी किसी के साथ छल (बेईमानी) न करो|

हिंदी रूपांतरण: स्वप्निल श्रीवास्तव (इशू)

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