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Vietnam ki Lok Kathayen-1 (वियतनाम की लोक कथाएँ-1)

कहानी-मच्छर खून क्यों पीते हैं?: वियतनाम की लोक-कथा

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“क्या आपको पता है, केवल मादा मच्छर ही इंसानों को क्यों काटती हैं और खून पीती हैं ?”

बहुत समय पहले की बात है। वियतनाम के एक गाँव में मछुवारा और उसकी पत्नी रहते थे। मछुवारा मछली पकड़ता और उसकी पत्नी रेशम के कीड़े पालती। मछुवारा बड़ा मेहनती था, पर उसकी पत्नी को जिंदगी में तमाम ऐशो-आराम की अभिलाषा थी।

एक दिन मछुवारे की पत्नी अचानक बीमार पड़ गई। मछुवारा उस वक्त काम से बाहार गया था। जब वह घर लौटा तो उसने पाया कि उसकी पत्नी दुनिया से चल बसी। मछुवारा घुटने टेक कर ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी उसे आकाशवाणी सुनाई दी कि वह समुद्र के बीच स्थित एक विशाल पहाड़ी पर अपनी पत्नी का शव ले जाए।

कई दिनों की यात्रा के बाद मछुवारा अपनी पत्नी के शव के साथ उस पहाड़ी पर पहुँचा और एक खूबसूरत फूलों के बाग में ले जाकर शव को रख दिया। उसकी पलकें थकान से झपक ही रही थीं कि अचानक सफेद बालों और तारों-सी चमकती आँखोंवाले एक महापुरुष वहाँ प्रकट हुए। उन महापुरुष ने मछुवारे से कहा कि वह उनका शिष्य बनकर इसी जगह शांति से रहे। पर मछुवारे ने कहा कि वह अपनी पत्नी को बेहद प्यार करता है और उसके बगैर रह नहीं सकता।

महापुरुष मछुवारे की इच्छा जानकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि वह अपनी उँगली काटकर खून की तीन बूँदें अपनी पत्नी के शव पर गिरा दे। मछुवारे ने वैसा ही किया। खून की बूँदे पड़ते ही उसकी पत्नी जीवित हो गई। तब महापुरुष ने मछुवारे की पत्नी को चेतावनी दी कि अगर वह ईमानदार और मेहनती नहीं बनेगी तो उसे सजा भुगतनी पड़ेगी। यह कहकर वह महापुरुष वहाँ से विलुप्त हो गए।

मछुवारा और उसकी पत्नी नाव पर बैठकर चल दिए। रास्ते में एक गाँव के किनारे उन्होंने नाव रोकी। मछुवारा खाने-पीने का कुछ सामान खरीदने चला गया। नाव में बैठी उसकी पत्नी मछुवारे के लौटने की प्रतीक्षा कर रही थी। तभी एक विशाल सुसज्जित नाव उसके पास आई। उस नाव का मालिक एक अमीर था। उसने मछुवारे की पत्नी को अपनी नाव पर आकर चाय पीने की दावत दी। चायपान खत्म हुआ तो अमीर ने मछुवारे की पत्नी से उसकी खूबसूरती की प्रशंसा की और उससे शादी का प्रस्ताव रखा। यह भी वादा किया कि वह उसे अपने महल की एकमात्र रानी बनाकर रखेगा। मछुवारे की पत्नी का तो सपना ही था कि वह अमीर बने, उसकी सेवा में कई नौकर चाकर हों। उसने फ़ौरन ही उस अमीर का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ।

मछुवारा जब गाँव से खरीदारी कर लौटा तो एक बूढ़े नाविक ने उसे किस्सा सुनाया। मछुवारा अपनी पत्नी की धोखेबाजी से आगबबूला हो उठा। वह फौरन उस अमीर के घर को रवाना हुआ और कुछ ही दिनों में वह वहाँ जा पहुँचा। उसके महल में पहुँच उसने एक नौकर से प्रार्थना की कि वह महल के मालिक से मिलना चाहता है। तभी अचानक उसकी पत्नी फूल तोड़ने के लिए बगीचे में आई और मछुवारे को देख चकित रह गई। उसने मछुवारे से कहा कि वह यहाँ बेहद सुखी है और यहाँ से कहीं नहीं जाना चाहती।

मछुवारे ने कहा कि वह भी उसे वापस नहीं ले जाना चाहता। वह तो अपने खून की तीन बूँदें वापस लेने आया है जो उसकी पत्नी से लौटा दे। बस !

उसकी पत्नी इस बात से बेहद प्रसन्न हुई कि चलो खून की तीन बूँदें देकर ही छुटकारा मिल जाएगा। ऐसा कहकर उसने तुरंत अपनी एक उँगली में गुलाब का काँटा चुभाया और मछुवारे की बाँह पर खून टपकाने लगी। जैसे ही खून की तीसरी बूँद गिरी, उसका शरीर सिकुड़ने लगा और वह मादा मच्छर के रूप में बदल गई। यही उसकी सजा थी। वह मादा मच्छर बनकर मछुवारे के सिर पर मँडराने लगी, जैसे भन्नाकर कह रही हो, “मुझे खून लौटा दो ! मैं माफी माँगती हूँ, मैं माफी माँगती हूँ!!’’

कहते है आज भी वह मच्छर के रूप में इंसानों का खून पीती है की शायद उसे अपना रूप वापस मिल जाए|

सीख: धोखाधड़ी से किसी का भला नहीं होता।

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