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Dakshin Africa ki Lok Kathayen -6(दक्षिण अफ्रीका की लोक कथाएं-6)

कहानी-मनुष्यों को ज्ञान कैसे मिला (How do human got wisdom)- अफ्रीकी लोक कथा

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बहुत समय पहले की बात है। अफ्रीका के किसी भूभाग में कवाकी नाम का एक आदमी रहता था। पूरी दुनिया में वही सबसे बुद्धिमान था और सभी लोग उससे सलाह और मदद मांगने आते थे।

एक दिन कवाकी किसी बात पर दूसरे आदमियों से नाराज़ हो गया और उसने उन्हें दंड देने की सोची। बहुत सोचने के बाद उसने यह तय किया कि वह अपना सारा ज्ञान उनसे हमेशा के लिए छुपा देगा ताकि कोई और आदमी ज्ञानी न बन सके। उसी दिन से उसने अपना सारा ज्ञान बटोरना शुरू कर दिया। जब उसे लगा कि उसने दुनिया में उपलब्ध सारा ज्ञान बटोर लिया है तब उसने सारे ज्ञान को मिटटी के एक मटके में बंद करके अच्छे से सीलबंद कर दिया। उसने यह निश्चय किया कि उस मटके को वह ऐसी जगह रखेगा जहाँ से कोई और आदमी उसे न , ढूंढ पाए।

कवाकी का एक बेटा था जिसका नाम कवेकू था। समाली को धीरे-धीरे यह अनुभव होने लगा कि उसका पिता किसी संदिग्ध कार्य में लिप्त है इसलिए उसने कवाकी पर नज़र रखनी शुरू कर दी। एक दिन उसने अपने पिता को एक मटका लेकर दबे पांव झोपडी से बाहर जाते देखा। समाली ने कवाकी का पीछा किया। कवाकी गाँव से बहुत दूर एक जंगल में गया और उसने मटके को सुरक्षित रखने के लिए एक बहुत ऊंचा पेड़ खोज लिया। अपना ज्ञान दूसरों में बंट जाने की आशंका से भयभीत कवाकी मटके को अपनी आँखों के सामने ही रखना चाहता था इसलिए वह अपनी छाती पर मटके को टांगकर पर पेड़ पर चढ़ने लगा। इस तरह अपनी छाती पर मटका टांगकर पेड़ पर चढ़ना तो लगभग नामुमकिन ही था! उसने कई बार पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की लेकिन वह ज़रा सा भी न चढ़ पाया। सामने की ओर मटका टंगा होने के कारण वह पेड़ को पकड़ ही न पा रहा था।

कुछ देर तक तो समाली अपने पिता को पेड़ पर चढ़ने का अनथक प्रयास करते देखता रहा। जब उससे रहा न गया तो वह चिल्लाकर बोला – “पिताजी, आप मटके को अपनी पीठ पर क्यों नहीं टांगते? तब आप पेड़ पर आसानी से चढ़ पायेंगे!”

कवाकी मुड़ा और बोला – “मुझे तो लगता था कि मैंने दुनिया का सारा ज्ञान इस मटके में बंद कर लिया है! लेकिन तुम तो मुझसे भी ज्यादा ज्ञानी हो! मेरी सारी बुद्धि मुझे वह नहीं समझा पा रही थी जो तुम दूर बैठे ही जान रहे थे!” उसे समाली पर बहुत गुस्सा आया और क्रोध में उसने मटका जमीन पर पटक दिया। जमीन पर गिरते ही मटका टूट गया और उसमें बंद सारा ज्ञान उसमें से निकलकर पूरी दुनिया में फ़ैल गया और सारे मनुष्य बुद्धिमान हो गए।

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