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Ishhoo Exclusive Satire/ Hasya Vyang

Choti Hasya kahani-Budiya ke Baal (छोटी हास्य कहानी- बुढ़िया के बाल)

अति लघु हास्य कथा..बुढ़िया के बाल

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Photo by Ryanniel Masucol on Pexels.com
रामखिलावन का परिवार आज बहुत खुश था। माँ सावित्री देवी, बीवी सुमन और तीन साल की बेटी पुष्पा दशहरा देखने जो आए थे।
आज रावण दहन था…घर पर सभी पकवान तैयार थे । सबने बोला कि पहले मेला घूमेंगे फिर पेट पूजा करेंगे।
चारो सजे- धजे मेले की रौनक में खोए थे। राम खिलावन बिटिया को बता रहा था, “दशहरा मतलब बुराई पर अच्छाई की विजय” तभी पुष्पा की माँ बोली, ” पुष्पा, ‘बुढ़िया के बाल’ खाओगी ?”
पुष्पा उचक कर बोली , “अच्छा, पर बुढ़िया कहाँ है जिसे रोज़ कोसती हो फ़ोन पर कि बुढ़िया दिमाग खा गई….”

बस रामायण ख़तम, महाभारत शुरू।

कहानी समाप्त।।

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