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Korea ki Lok Kathayen-2(कोरिया की लोक कथाएँ-2)

कहानी-होशियार छोटा चरवाहा: कोरिया की लोक-कथा

एक चरवाहे का बेटा शामो हर रोज अपनी भेड़ें चराने के लिए मैदान में जाया करता था । वह रोज सुबह भेड़ों को लेकर हरे-भरे मैदानों की ओर चल पड़ता था । सूरज डूबने से पहले ही वह घर को वापस चल देता था ।

एक दिन वह मैदान में बैठा कुछ सोच रहा था कि अचानक जोर से उछल पड़ा । उसने अपनी फर की टोपी जोर से हवा में उछाल दी ।

टोपी हवा में उछल कर उधर से गुजर रहे घोड़े के मुंह पर जा गिरी । अचानक टोपी गिरने से घोड़ा बिदक गया और अपनी पिछली टांगों पर खड़ा हो गया । घोड़े के अगले पैर ऊपर उठ जाने से घुड़सवार खेत में जा गिरा ।

इस घोड़े पर सवार युवक शहर के बड़े व्यापारी का बेटा था । वह सज-धज कर पिता के काम से कहीं जा रहा था ।

युवक को बहुत जोर का क्रोध आ गया । वह कपड़े झाड़कर खड़ा हो गया और चिल्लाकर चरवाहे के लड़के से बोला – “ऐ लड़के, तुम्हें जरा भी अक्ल नहीं । तुमने मेरे घोड़े को डरा दिया और मुझे गिरा दिया ।”

शामो बोला – “मैंने तो खुशी में टोपी उछाली थी मुझे क्या पता था कि यह घोड़े के पास गिरेगी और घोड़ा डर जाएगा ।”

“ऐसी क्या खुशी मिल गई तुम्हें । जरा हमें भी तो बताओ और अगर मुझे चोट लग जाती तो तुम्हारी खैर नहीं थी ।” युवक बोला ।

शामो बोला – “मेरे पिता ने मुझसे एक सवाल पूछा था मैंने उसका उत्तर ढूंढ़ लिया है ।”

“ऐसा क्या सवाल था ?”

“सवाल यह था कि वह क्या चीज है जो आदमी से ऊंची है, लेकिन मुर्गी से छोटी ।”

“भला ऐसी क्या चीज हो सकती है?”

“तो क्या इसका उत्तर आपको भी नहीं मालूम ।”

“मालूम तो है पर तुम्हारे मुंह से सुनना चाहता हूं ।” युवक ने चतुराई से कहा ।

शामो बोला – “वह चीज टोपी है । यह मनुष्य के सिर पर रहकर मनुष्य से ऊंची रहती है, परंतु जमीन पर रख दो तो मुर्गी से भी छोटी बन जाती है ।”

युवक शामो की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ । वह बोला – “काफी होशियार जान पड़ते हो । यदि तुमने मेरा एक काम कर दिया तो में तुम्हें ढेर-सा इनाम दूंगा । कल मैं लौटते वक्त तुम्हारे पास आऊंगा । तुम मेरे लिए एक ऐसी भेड़ का इंतजाम करके रखना, जो न काली हो, न भूरी हो, न सफेद हो और न ही चितकबरी हो ।”

यह कहकर वह युवक वहां से चला गया । शामो उसके जाने के बाद सोचता रहा ।

अगले दिन शामो अपनी भेड़ चरा रहा था । तभी कल वाला युवक अपने घोड़े पर सवार आया और बोला – “लड़के क्या तुमने मेरे लिए मेरी मनपसन्द भेड़ लाकर रखी है ।”

शामो बोला – “आपकी मनपसन्द भेड़ मेरे घर पर है । आप उसे किसी को भेज कर मंगवा सकते हैं । परंतु ध्यान रखिएगा कि जो व्यक्ति लेने आए वह न रविवार को आए, न सोमवार या मंगल को न बुद्ध या बृहस्पति को, न शुक्र या शनिवार को दिन में आए न रात्रि में ।”

शामो की बात सुनकर युवक जोर से हंसा और बोला – “मैं तुम्हारी बुद्धिमत्ता से खुश हुआ । यह सोने की पांच अशर्फियां तुम्हारा इनाम है । यदि तुम कभी कोई नौकरी करना चाहो तो मेरे पास चले आना ।”

यह कर कर युवक ने अपना पता शामो को दे दिया और घोड़े पर सवार होकर घोड़ा दौड़ाता हुआ चला गया ।

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