Categories
Bed time Stories Chinese Lok Kathayen Lok Kathayen Story

Chinese Lok Kathayen-2/ चीनी लोक कथाएँ-2

कहानी-चितकबरे जूते: चीन की लोक कथा

ishhoo story

फुंग ची बहुत रईस आदमी था । उसने अपने लिए अपार दौलत जमा कर रखी थी । उसकी पत्नी उसे लाख समझाती थी कि इतनी कंजूसी अच्छी बात नहीं, परंतु वह मानता ही नहीं था ।

फुंग ची इतना कंजूस था कि कपड़े फट जाने पर उन्हीं पर पैबंद लगवा कर पहनता रहता था । यही हाल उसके जूतों का था । उसने वर्षों से अपने लिए जूते नहीं खरीदे थे । उनमें जगह-जगह छेद होकर पैबंद लग चुके थे । सर्दियों में वह गर्मी पाने के लिए गोबर की भांप से सेंकता था ।

घर में यूं तो नौकर-चाकर भी थे, परंतु वे भी उसकी कंजूसी से परेशान होकर जल्दी ही भाग जाते थे ।

एक दिन फुंग ची एक गली से गुजर रहा था । वहां बच्चे गली में खेल रहे थे । फुंग ची जब उधर से निकला तो उसका एक पैर नाली में चला गया । उसने पैर निकाला तो देखा कि उसका जूता फट गया था । पंजे के पास से तला अलग होकर उसका पैर दिखाई दे रहा था । बच्चों ने फुंग ची को उसके घर पहुंचने में सहायता की और वह अपने घर पहुंच गया ।

अगले दिन फुंग ची मोची के पास जूते ठीक करवाने पहुंचा तो मोची ने बताया – “सेठ जी, ये जूते बहुत पुराने हो चुके हैं अत: इन्हें जोड़ने का कोई लाभ नहीं है ।”

परंतु फुंग ची ने जिद करके उन्हीं जूतों को ठीक करवा लिया । एक सप्ताह बाद वह फिर उसी गली से गुजरा, जहां बच्चे खेल रहे थे । एक बच्चे की निगाह फुंग ची के जूतों पर पड़ी । वह एक बच्चे के कान में फुसफुसाया – “जरा इसके जूते तो देख ।”

सभी बच्चे हंसकर फुंग ची के जूते देखने लगे । फुंग ची चिढ़ गया और जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाने लगा । बच्चों को इसमें बहुत आनन्द आया । शुई बड़ी नटखट लड़की थी वह चिल्लाकर बोली – “वाह, क्या चितकबरे जूते हैं ।”

सारे बच्चे एक स्वर में बोले – “क्या चितकबरे जूते हैं ?”

फुंग ची सुन कर चिढ़ते हुए आगे बढ़ गया । इसके बाद जब भी फुंग ची उधर से गुजरता बच्चे चिल्लाकर कहते – “चितकबरे जूते ।”

धीरे-धीरे “चितकबरे जूते” फुंग ची की चिढ़ बन गई। वह जहां कहीं भी जाता, कोई न कोई जरूर आवाज लगा कर कहता – “चितकबरे जूते ।” और फुंग ची चिढ़ जाता ।

घर पर उसकी पत्नी ने बहुत समझाया कि अब इन जूतों को फेंककर नए जूते खरीद लो, परंतु फुंग ची ने उसकी बात नहीं मानी, लेकिन जब धीरे-धीरे बात पूरे शहर में फैल गई तो वह अपने जूतों से सचमुच परेशान हो गया । उसने निश्चय किया, वह इन जूतों को किसी भिखारी को दान में दे देगा । अत: वह सुबह उठकर सैर को गया और लौटते वक्त एक भिखारी को अपने जूते दे आया ।

भिखारी जूते पाकर बहुत खुश हुआ क्योंकि सर्दी का मौसम था । परंतु सेठ के जाने के बाद जब उसने जूतों को देखा तो उन पर बहुत सारे पैबंद देखकर उन्हें हैरानी से देखने लगा । फिर सड़क के किनारे बैठकर वह उन जूतों को पहनने का प्रयास करने लगा ।।

उसी समय उधर से पुलिस का एक सिपाही निकला । उसने भिखारी को जूतों को उलटते-पलटते देखा तो उसे शक हुआ कि भिखारी कहीं से जूते चुरा कर लाया है । उसने भिखारी को अपने पास बुलाया तो जूतों को देखते ही पहचान गया कि ये जूते फुंग ची के हैं । वह भिखारी से बोला – “तूने जूते चोरी किए हैं, अत: तुझे थाने चलना पड़ेगा ।”

भिखारी बोला – “साहब, मैं यह जूते चुरा कर नहीं लाया । एक सेठ जी मुझे अभी देकर गए हैं ।”

परंतु सिपाही बोला – “जिस सेठ के यह जूते हैं, वह कंजूस सेठ तुझे जूते दे ही नहीं सकता । उसे ये जूते बहुत प्रिय हैं । तू झूठ बोलता है । मैं थाने में चल कर ही तय करूंगा कि तुझे क्या सजा दी जाए ।”

सिपाही भिखारी को लेकर थाने में चला गया और फुंग ची को बुलवा भेजा । फुंग जी थाने के बुलावे को सुनकर भौचक्का रह गया और सोचने लगा कि मेरा वहां क्या काम हो सकता है ? फुंग ची थाने पहुंच गया तो अपने पुराने जूतों को वहां रखे देखकर उसे बहुत हैरानी हुई । भिखारी को जेल में डाल दिया गया था ।

फुंग ची ने यह कहने की कोशिश की कि भिखारी ने चोरी नहीं की है परंतु सिपाहियों ने बिना सुने सेठ को उसके चितकबरे जूते वापस दे दिए । फुंग ची बहुत दुखी मन से जूते वापस ले लाया और उनसे छुटकारा पाने का उपाय सोचने लगा ।

उसकी पत्नी ने कहा – “मेरी बात मानो तो जूतों को कूड़ेदान में फेंक दो ।”

फुंग ची को यह विचार जंच गया और उसने अपने घर के कूड़े के साथ जूते कूड़ेदान में फेंक दिए । दो दिन तक जब जूतों की कोई खबर नहीं मिली तो फुंग ची जूतों की तरफ से निश्चिंत हो गया ।

परंतु तीसरे दिन सुबह घर की घंटी बजी । दरवाजे पर एक सफाई कर्मचारी खड़ा था, वह बोला – “सेठ जी, मैं आपसे इनाम लेने आया हूं ।”

सेठ ने खुश होकर कहा – “किस बात का इनाम मांग रहे हो, पहले यह तो बताओ ?”

सफाई कर्मचारी ने पीछे से जूते निकालते हुए कहा – “किसी नौकर या चोर ने आपके चितकबरे जूते कूड़ेदान में छिपा दिए थे । आज मैंने सफाई की तो सोचा आपके जूते आपको वापस कर दूं तो मुझे इनाम मिलेगा, इसलिए आपके घर चला आया ।”

फुंग ची की इच्छा हुई कि वह बहुत जोर से चीखे और क्रोध से डांट कर भगा दे । परंतु वह बड़ा सेठ होने के नाते ऐसा न कर सका । चुपचाप जूते रखकर कर्मचारी को वहां से भगा दिया ।

अब फुंग ची का किसी काम में मन नहीं लगता था । वह हरदम उन जूतों से पीछा छुड़ाने का उपाय सोचता रहता था । एक दिन उसके मन में विचार आया कि क्यों न मैं इन जूतों को नदी में फेंक दूं, पानी के बहाव के साथ ये जूते कहीं दूर चले जाएंगे, फिर उसने एक पुल पर खड़े होकर उन जूतों को नदी में फेंक दिया और चुपचाप घर की ओर चल दिया ।

थोड़ी ही देर में कुछ बच्चे उसके पास भागते हुए आए और बोले – “अंकल आपके चितकबरे जूते किसी ने नदी में फेंक दिए । हम नदी में नहा रहे थे तभी हमने इन जूतों को किसी को ऊपर से फेंकते देखा । हमने पानी में तुरंत आपके चितकबरे जूते पहचान लिए । यह लीजिए अपने जूते ।”

अब फुंग ची क्रोध से पागल हुआ जा रहा था । उसे जूतों से छुटकारा पाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था । वह सारा दिन घर में ही बिताने लगा । उसका व्यापार में मन नहीं लगता था । इस कारण उसका व्यापार मंदा होता जा रहा था ।

एक दिन सबुह वह नगर की सीमा पर पहुंच गया और नगर से बाहर जाने वाले एक यात्री से प्रार्थना की – “भाई, यह जूते चाहें तो आप ले लें । अन्यथा आप नगर से बाहर जा रहे हैं तो इन्हें अपने साथ ले जाएं, वहां किसी जरूरतमंद को दे दें ।”

अजनबी व्यक्ति सेठ की तरफ हैरानी से देख रहा था कि कोई व्यक्ति अपने जूते शहर से बाहर क्यों भेजना चाहता है । फिर उसने सेठ की परेशानी समझकर जूतों को एक थैले में डाल लिया ।

सेठ वापस आ गया, परंतु अगले दिन नगर के राजा ने फुंग ची को बुलाने भेजा तो फुंग ची बहुत हैरान-परेशान हो गया । वह वहां पहुंचा तो उसे बताया गया कि एक परदेशी उसके चितकबरे जूते चुराकर नगर की सीमा के बाहर ले जा रहा था, अत: उसे गिरफ्तार कर लिया गया है ।

फुंग ची रोने और गिड़गिड़ाने लगा । राजा को कुछ समझ में न आया कि जूते मिल जाने पर वह रो क्यों रहा है । राजा ने पूछा – “फुंग ची, तुम इतने धनी सेठ हो और तुम्हारे ये प्रसिद्ध चितकबरे जूते तुम्हें मिल गए फिर भी तुम रो क्यों रहे हो ?”

फुंग ची ने रोते-रोते राजा को जूतों और कंजूसी की सारी कहानी सुना दी । साथ ही यह भी बता दिया कि लोगों ने उसकी चिढ़ ‘चितकबरे जूते’ बना दी है ।

राजा ने कहा – “ठीक है, हम इन चितकबरे जूतों को शाही संग्रहालय में रख देते हैं ताकि जब लोग तुम्हारे जूते देखें तो तुम्हारी कंजूसी को याद करें । तुम्हें इन चितकबरे जूतों से मुक्ति मिल चुकी है, तुम यहां से खुशी से जा सकते हो ।”

फुंग ची को इतनी राहत तो अवश्य मिल गई कि अब वे चितकबरे जूते उसके पास वापस नहीं आएंगे । परंतु अब वह यह सोचकर परेशान था कि शाही संग्रहालय में जूतों को रखने से लोग उन जूतों को कभी नहीं भूल सकेंगे ।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s