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New Zealand ki Lok Kathayen-2/ न्यूजीलैंड की लोक कथाएँ-2

वृक्षों के लिए पत्तियाँ: न्यूजीलैंड की लोक-कथा

बहुत पुरानी बात है जब वृक्षों पर पत्तियाँ नहीं होती थीं । मनुष्य, पक्षी और अन्य प्राणी वृक्षों को बिना पत्तियों के ही देखा करते थे । सभी लोग उन्हीं परिस्थितियों के अनुसार ढल हुए थे। तेज गर्मी के दिनों में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए अपनी व्यवस्था किया करते थे क्योंकि पेड़ पत्तियों के बिना शांत छाया प्रदान नहीं कर पाते थे। सर्दियों के दौरान सभी गुफाओं में रहते थे, क्योंकि नंगे पेड़ बाहरी बर्फीली ठंडी हवाओं को नहीं रोक पाते थे ।

एक बार, अत्यंत भीषण गर्मी पड़ी। तालाब, नदी, नाले सब सुख गए थे ।

गाँवों के सभी जीवजंतुओं ने सभा आयोजित की । उन्होंने राजा से अनुरोध किया गर्मी अत्यंत ज्यादा है, उनका जीवन दूभर हो गया है कृपया करके उनकी इस गर्मी से रक्षा करें । हो सके तो वृक्षों को ढक दें जिससे गर्मी से राहत मिल सके ।

राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया कि वृक्षों पर रंगीन तिरपाल लगा दी जाय , जिससे गर्मी से लोगों को कुछ राहत मिल सके एवं कुछ पानी की व्यवस्था की जाय ।

मंत्री ने जंगल में जा कर कुछ वृक्षों को रंगीन तिरपाल से ढक दिया । जिसके नीचे जीव जंतुओं को कुछ राहत मिली । रंगीन तिरपाल देख कर सभी लोगों को सांत्वना मिली । वह पानी की कमी को अब कुछ हद तक सहन करने में सक्षम दिख रहे थे ।

मंत्री ने जब देखा कि रंगों ने जानवरों को खुश कर दिया है और वे पानी के बारे में भूल गए हैं तो वह चुपचाप लौट आया ।

जब मनुष्यों ने छायादार वृक्षों के बारे में सुना तो वह भी राजा के पास अपना अनुरोध ले कर गए । उन्होंने राजा से निवेदन किया कि उनकी भी इस भीषण गर्मी से रक्षा करें एवं छायादार वृक्षों का प्रबंध करें ।

राजा ने अपने मंत्री से उचित व्यवस्था करने के लिये कहा ।

मंत्री ने दो चार वृक्षों को छायादार बनाया और अपने अन्य कार्यों में व्यस्तता के चलते वापस लौट आया ।

मनुष्यों को अन्य जीवजन्तु की तरह शांतिपूर्ण नहीं थे। वो छायादार वृक्षों का लाभ लेने के लिये आपस में लड़ाई करने लगे । जब लड़ाई अधिक गंभीर हो गई तब इस के बारे में राजा को बताया गया ।

राजा ने संबंधित मंत्री से पूछा, “प्रिय मंत्री … हमारे लोग इतने दुखी क्यों हैं? यह बहुत बुरा है। आपको इसके बारे में कुछ करना चाहिए।”

मंत्री ने कहा सर, वृक्षों में तिरपाल लगाने से अच्छा होगा हम गोंद से पत्तियों को उन पर चिपका दें । इससे वृक्ष रंगीन दिखेंगे और उनमें से हवा का वहाव भी हो सकेगा जो वातावरण को ठंडक प्रदान करेगा । इस तरह लोगों को ज्यादा राहत मिल सकेगी ।

राजा मान गया और बोला “ठीक है, वृक्षों पर पत्तियाँ चिपका दी जाएँ ।”

मंत्री ने कहा, सर; अगर हम एक आकार और नाप की पत्तियाँ वृक्षों पर लगाएँगे तो यह अधिक सुंदर लगेंगे । इस काम के लिये हमें कुछ कारीगरों की आवश्यकता होगी ।

राजा ने कुछ कारीगरों की नियुक्ति के आदेश दे दिया । जब कारीगरों ने पत्तियाँ बनानी शुरू की तब मंत्री ने उन्हें कुछ कुओं में इकठ्ठा कर लिया । उसके बाद मंत्री ने उन कारीगरों की मदद से वृक्षों पर पत्तियाँ लगवानी शुरू कीं ।

एक आकार और नाप की पत्तियाँ बनाने में कारीगरों काफ़ी वक़्त लगता था । लोग गर्मी से परेशान हो रहे थे, उनकी देरी संबंधित शिकायतें आने लगीं ।

गाँव के मुखिया ने कहा, मंत्री जी ; आपके कारीगर बहुत ढ़ीले हैं । वो पूरे दिन में एक वृक्ष पर भी ठीक तरह से पत्तियाँ नहीं लगा पाते हैं । हम सब गर्मी से मर जाएंगे ।

मंत्री ने बोला, देखो! किसी भी काम में समय लगता है । अगर आप इतने उतावले हो तो हमारी मदद क्यों नहीं करते ।

मुखिया ने कहा, हम अवश्य ही आप की मदद करेंगे । पूरी जनता मदद करने के लिये तैयार थी । मगर वह एक आकार और नाप की पत्तियाँ नहीं बना पा रहे थे । सैकड़ों आकार और प्रकार की पत्तियाँ अलग अलग समूह के लोग बना रहे थे ।

मंत्री जी मान गए और बोले, ” कोई बात नहीं, महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि कार्य जितनी जल्दी हो सके पूर्ण होना चाहिये ।

अब सभी लोग पत्तियों को काटने और पेड़ों पर चिपकाने में व्यस्त हो गए । जानवर भी देखादेखी मदद करने लगे ।

जल्द ही वृक्ष पत्तियों से लद गए । पत्तियाँ चिपकाते समय काफी पत्तियाँ नीचे जमीन पर गिर कर बिखर गईं । सभी खुश दिख रहे थे । छायादार वृक्षों के नीचे बैठना सभी को मजेदार लग रहा था । मनुष्य और प्राणी खुश थे । पक्षी ख़ुशी से चहक रहे थे । वृक्षों पर पत्तियाँ आने के परिणाम स्वरूप पानी भी बरसना शुरू हो गया ।

इस प्रकार, वृक्षों ने विभिन्न आकार प्रकार एवं रागों के पत्तों का सृजन करना तथा सभी प्राणियों के लिए ठंडी हवा प्रदान करना शुरू किया।

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