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Iceland ki Lok Kathayen-1(आइसलैंड की लोक कथाएँ-1)

कहानी- चम्मच का सूप: आइसलैंड की लोक कथा

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एक बार एक किसान किसी काम से शहर गया । जैसे ही शाम होने लगी, उसे लगा कि उसे तुरंत गांव लौट जाना चाहिए । अगर देर हो गई तो अंधेरे में घर पहुंचना मुश्किल हो जाएगा । वह अपना काम अधूरा छोड़कर गांव की ओर चल दिया ।

वह थोड़ी ही दूर गया था कि अचानक बादल घिर आए, ठंडी हवाएं चलने लगीं । उसने अपनी चाल तेज कर दी । परंतु कुछ ही देर में बूंदा-बांदी होने लगी । किसान ने सोचा कि अगर मैं तेज चलूं तो शायद रात होने से पहले अपने घर पहुंच जाऊंगा ।

परंतु मौसम को यह मंजूर नहीं था । काली घटाओं के कारण जल्दी ही अंधेरा छाने लगा । बारिश भी तेज होने लगी । किसान ने आगे बढ़ना ठीक नहीं समझा । आगे जंगल का खतरनाक रास्ता था । एक तो खराब मौसम, ऊपर से जंगली रास्ता सोचकर किसान डर से मारे कांपने लगा ।

वह एक छोटे-से घर के आगे बरामदे में दुबक कर बैठ गया । परंतु ठंडी हवाओं के कारण उसे सर्दी लगने लगी । रात होते-होते उसे सर्दी के साथ-साथ भूख भी लगने लगी । उसे कोई उपाय नहीं सूझ रहा था । वह सोचने लगा कि इस समय थोड़ा-सा कुछ गरम खाने को मिल जाता तो उसकी सर्दी भी मिट जाती और भूख भी कम हो जाती ।