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Italy ki Lok Kathayen-7(इटली की लोक कथाएँ-7)

कहानी- वफ़ादार शेर: इटली की लोक कथा

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पुराने समय में यूरोप में धनी लोग अपने यहाँ गुलाम रखा करते थे । उन गुलामों को अपने स्वामी की हर आज्ञा का पालन करना पड़ता था । ऐसे ही एक दास का नाम एन्ड्रोक्लीज़ था । एन्ड्रोक्लीज़ का स्वामी अपने गुलामों के साथ जानवरों सा व्यवहार करता था । उनसे बहुत काम लिया जाता था फिर भी उन्हें भूखा रहना पड़ता था । एन्ड्रोक्लीज़ को भी दिन-रात यातना सहनी पड़ती । एक दिन वह यातनाओं से तंग आकर चुपके से भाग गया । वह जंगल की पहाड़ियों के बीच एक गुफा में रहने लगा ।

एक दिन वह जंगल में घूम रहा था कि उसने सामने से आते हुए एक शेर को देखा । एन्ड्रोक्लीज़ डर गया । वह शेर से दूर भागना चाहता था परंतु उसे उपयुक्त अवसर नहीं मिला । शेर धीरे- धीरे उसके पास आया और बैठ गया । वह अपना अगला पैर बार – बार उठाकर एन्ड्रोक्लीज़ को कुछ इशारा कर रहा था । उसका भय दूर हो गया । उसने ध्यान से देखा तो पाया कि शेर के पंजे में एक बड़ा-सा काँटा गड़ा हुआ था । उसने तुरन्त काँटा खींचकर निकाल दिया और घाव पर जड़ी-बूटियों का रस डाल दिया । शेर को आराम मिला । उसने एन्ड्रोक्लीज़ को कोई हानि नहीं पहुँचाई ।

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Italy ki Lok Kathayen-6(इटली की लोक कथाएँ-6)

कहानी- तीन फायदेमंद बातें: इटली की लोक कथा

बहुत दिन पहले रोम में डोमीटियन नामक एक सम्राट्‌ हुआ था। वह बहुत बुद्धिमान तथा न्यायप्रिय सम्राट था। उसके राज्य में कोई भी अपराधी व दुष्ट पनपने न पाता था। सजा के डर से सब कोई अपराध करने से घबराते थे।

एक दिन जब वह अपने कमरे में बैठा था तो एक सौदागर ने आकर उसके द्वार को खटखटाया। द्वारपाल ने द्वार खोला और उससे द्वार पर दस्तक देने का कारण पूछा, तो वह सौदागर बोला, “मैं कुछ ऐसी चीजें बेचने आया हूं जो फायदेमंद हैं।”

उसकी बात सुनकर द्वारपाल उसे अन्दर ले गया और सम्राट्‌ के सामने हाज़िर किया। सौदागर ने सम्राट्‌ के सामने बड़ी नम्रता से झुककर अभिवादन किया तो सम्राट्‌ ने पूछा, “कहो, तुम्हारे पास बेचने के लिए क्या सौगात है?”

सौदागर बोला, “राजन्! मैं ऐसी तीन बातें बेचना चाहता हूं जो तर्क तथा ज्ञान से भरी हुई हैं।”

“अच्छा, यह बात है। बताओ, उनका मूल्य क्या लोगे?”

“केवल एक हजार मुद्राएँ।”

इस पर सम्राट्‌ बोला, “और यदि वे बातें किसी काम की न हुईं तो क्या मेरा धन मुफ्त में जायेगा?”

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Italy ki Lok Kathayen-5(इटली की लोक कथाएँ-5)

इटालो कैलवीनो की कहानी- तीन डैक का जहाज: इटली की लोक कथा

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एक बार की बात है कि एक बहुत ही गरीब पति पत्नी थे जो देश की बस्ती से काफी बाहर की तरफ रहते थे। उनके एक बच्चा हुआ पर वहाँ आस पास में कोई ऐसा आदमी नहीं रहता था जो उस बच्चे के बैप्टाइज़ेशन के समय उसका गौडफादर बन सकता।

वे लोग शहर भी गये पर वहाँ भी वे किसी को नहीं जानते थे। और बिना गौडफादर के वे अपने बच्चे को बैप्टाइज़ भी नहीं करा सकते थे। वे शहर से नाउम्मीद हो कर लौटने ही वाले थे कि उन्होंने चर्च के दरवाजे पर एक आदमी बैठा देखा जिसने एक काला शाल ओढ़ रखा था।

उन्होंने उससे भी पूछा — “जनाब, क्या आप मेरे इस बेटे के गौडफादर बनेंगे?” वह आदमी राजी हो गया और इस तरह उनके बच्चे का बैप्टाइज़ेशन हो गया।

बैप्टाइज़ेशन करा कर जब वे चर्च से बाहर निकले तो उस अजनबी ने कहा — “मुझे अब अपने गौडसन को कोई भेंट भी तो देनी चाहिये न, तो लो यह बटुआ लो। इस बटुए के पैसे को तुम इसका पालन पोषण करने में और इसको पढ़ाने लिखाने में खर्च करना और जब यह पढ़ना सीख जाये तो इसको यह चिठ्ठी दे देना।”

बच्चे के माता पिता बच्चे के गौडफादर की यह भेंट देख कर बड़े आश्चर्यचकित हुए। इससे पहले कि वे उसको धन्यवाद देते या उसका नाम पूछते वह आदमी तो वहाँ से गायब ही हो गया।

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Italy ki Lok Kathayen-4(इटली की लोक कथाएँ-4)

इटालो कैलवीनो की कहानी- निडर जॉन: इटली की लोक कथा

एक बार की बात है कि इटली के एक शहर में एक निडर लड़का रहता था उसका नाम जॉन था। वह किसी से डरता नहीं था इसलिये सब उसको छोटा निडर जॉन कह कर बुलाते थे।

एक बार उसको दुनियाँ देखने की इच्छा हुई तो उसने कुछ पैसे लिये और दुनियाँ देखने निकल पड़ा। चलते चलते वह एक सराय में आया और वहाँ आ कर उसने सराय के मालिक से खाना और रात भर रहने के लिये की जगह माँगी।

सराय का मालिक बोला — “आज तो पूरी सराय भरी हुई है। कोई जगह खाली नहीं है पर अगर तुमको डर न लगे तो मैं तुम्हें एक ऐसी जगह बता सकता हूँ जहाँ तुम आराम से ठहर सकते हो।”

छोटा निडर जॉन बोला — “नहीं नहीं, मैं नहीं डरता, मैं क्यों डरूँगा? तुम मुझे जगह बताओ।”

सराय का मालिक बोला — “लोग तो उस महल के बारे में सुन कर ही काँप जाते हैं क्योंकि वहाँ अभी तक जो भी गया वहाँ से ज़िन्दा लौट कर नहीं आया। जो वहाँ बड़ी बहादुरी से रात गुजारने जाते हैं सुबह को फ्रायर वहाँ केवल उस आदमी की लाश लाने के लिये ही जाते हैं।”

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Italy ki Lok Kathayen-3(इटली की लोक कथाएँ-3)

इटालो कैलवीनो की कहानी-खुशी की तलाश: इटली की लोक कथा

राजा गिफ़ाड एक शांतिपूर्ण और शक्तिशाली राज्य पर शासन करते थे। उनकी प्रजा उन्हें पूजती थी और पूरी तरह उनपर विश्वास करती थी। साम्राज्य बहुत सुखी था।

राजा का एक युवा पुत्र राजकुमार जोनाश था। बुद्धिमान, प्रतिभाशाली और खूबसूरत युवक जोनाश कुछ दिनों से गहरी अप्रसन्नरता की स्थिति में था। अनेक प्रयासों के बाद भी राजा समझ नहीं पा रहा था कि उसका पुत्र हर समय इतना दुखी क्यों  रहता है। राजकुमार अकसर अपने कमरे कीखिड़की के पास बैठकर शून्य दृष्टि से खिड़की से बाहर देखता रहता। उसे अपने आस-पास घट रही घटनाओं में कोई दिलचस्पी नहीं थी। भव्य समारोहों और शाही उत्सवों में भी वह अप्रभावित-सा रहता।

राजा गिफ़ाड बहुत दिनों तक यह सहन नहीं कर पाए और उन्होंने अपने पुत्र से यह पूछने का निर्णय किया कि कौन-सी बात उसे परेशान कर रही है।

“जोनाश, कौन-सी बात तुम्हें इतना खाए जा रही है? तुम्हारे पास किस चीज़ की कमी है? कौन-सी चीज़ तुम्हें इतना परेशान कर रही है? कुछ समय से तुम खुश नहीं हो! मुझे बताओ, मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश करूँगा।”

युवा राजकुमार ने बस कंधे उचका दिए।

“क्या किसी हसीना ने तुम्हें सम्मोहित कर लिया है? महल में भटकने की बजाय उसके लिए अपना प्रेम प्रदर्शत करने के इससे बेहतर तरीके हैं।’

“नहीं पिता जी, यह लड़की की बात नहीं है। सच में मैं नहीं जानता कि मैं इतना दुखी क्योंए हूँ। मैं किसी चीज़ में खुशी महसूस नहीं करता। मैं खुश रहना चाहता हूँ, लेकिन नहीं जानता कि ऐसा कैसे करूँ।”

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Italy ki Lok Kathayen-2(इटली की लोक कथाएँ-2)

कहानी-अनंत इच्छाएँ: इटली की लोक कथा

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एक बार की बात है, एक राजा अपने देश के पड़ोस में सैर के लिए निकला । उसने देखा वहाँ की धरती बहुत उपजाऊ थी, चारों ओर फसलें लहलहा रही थीं । राजा मन में सोचने लगा की कितना अच्छा होता यदि वह सुंदर और उपजाऊ क्षेत्र उसके राज्य में होता और वह उसका मालिक होता ।

उसी देश में एक अमीर व्यक्ति रहता था। वह अपने कार्य में इतना अधिक व्यस्त रहता था कि उसे बहार निकलने ओर घूमने-फिरने की फुर्सत नहीं होती थी । उसका लंबा-चौड़ा कारोबार था, ढेरों नौकर-चाकर थे और बड़े से मकान में रहता था । वह भी उस दिन सैर करने निकला । वहीं पर एक अत्यंत खूबसूरत महल बना था । धनी व्यक्ति सोचने लगा कि कितना सुंदर महल है , इसके बाहरी खंबे किसी बड़े कलाकार द्वारा बनाए हुए प्रतीत होते हैं । काश, अच्छा होता यदि वह उस मकान का मालिक होता ।

उस महल में एक सुंदर राजकुमारी रहती थी । उस दिन वह महल की खिड़की पर खड़ी थी । तभी घोड़े पर सवार एक सुंदर नौजवान उसने जाता हुआ देखा । राजकुमारी की इच्छा होने लगी , काश, उसे भी ऐसा ही प्यार नौजवान मिलता जिसके साथ वह अपना विवाह रचाती ।

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Italy ki Lok Kathayen-1(इटली की लोक कथाएँ-1)

कहानी-गरीबों को याद रखो: इटली की लोक कथा

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एक समय की बात है, किसी जगह पर तीन भाई साथ-साथ रहा करते थे। उनका सेब का एक पेड़ था। उन्होंने बारी-बारी उस पेड़ की देखभाल करने के लिए आपस में निश्चय किया था। जब दो भाई खेतों में काम करने चले जाते, तो तीसरा भाई पेड़ की रखवाली करने के लिए घर पर ही रह जाता था। वह यह देखता रहता कि कोई भी किसी प्रकार पेड़ को हानि न पहुंचा सके और न ही कोई चोरी से सेब तोड़ ले।

एक बार उन तीनों भाईयों की परीक्षा लेने के लिए स्वर्ग से एक दूत आया। भिखारी के रूप में, वह सेब के पेड़ के निकट गया । उस दिन सबसे बड़ा भाई पेड़ की रखवाली कर रहा था। वह भिखारी हाथ फैलाकर बोला, “बाबा, ईश्वर के नाम पर, एक पकी सेब दे दो ।”

सबसे बड़े भाई ने उसे एक सेब दे दी और कहा, “यह मेरे हिस्से की सेब है, इसलिए मैं तुम्हें दे रहा हूं। अन्य नाशपातियां मेरे भाइयों के हिस्से की हैं।”

दूत ने उसे धन्यवाद दिया और चला गया।

दूसरे दिन दूसरा भाई पेड़ की देखभाल कर रहा था। उस दिन भी दूत भिखारी के रूप में आया और एक पकी सेब की भीख मांगने लगा। दूसरे भाई ने कहा, “यह लो, यह सेब मेरे हिस्से की है। परन्तु मैं और नहीं दे सकता, क्योंकि ये मेरे भाइयों के हिस्से की हैं।”

दूत दूसरे भाई को भी धन्यवाद देकर चला गया।

तीसरे दिन जब दूत सबसे छोटे भाई के पास आया, तो उसने भी अपने बड़े भाइयों की भांति उत्तर दिया।

अगले दिन प्रात:काल दूत, साधु के रूप में, उन तीनों भाइयों के घर गया। उस समय तक वे सभी घर पर मौजूद थे। साधु ने कहा, “बच्चों, मेरे साथ आओ । सेब के पेड़ की रखवाली करने की अपेक्षा मैं तुम्हें अच्छा काम दूंगा।”

तीनों भाई उसके साथ हो लिए। चलते-चलते वे दूर एक बड़ी गहरी नदी के किनारे पहुंचे ।

साधु ने सबसे बड़े भाई से पूछा, “बेटे! मांग, क्यार मांगता है?”

सबसे बड़े भाई ने कहा, “कितना अच्छा होता, यदि इस नदी का जल मदिरा में बदल जाए और उसका मालिक मै बन जाऊं।”

साधु ने अपनी छड़ी घुमाई और सारी नदी मदिरा की हो गई। लोग बड़े-बड़े पीपों में मदिरा भर-भरकर ले जाने लगे। कुछ देर में ही ऐसा मालूम पड़ने लगा, मानो एक बड़ा व्यवसाय हो रहा हो। लोग अपने काम में व्यस्त इधर-उधर भाग रहे थे और सबसे बड़े भाई को सम्मानपूर्वक ‘मालिक-मालिक’ कहकर संबोधित कर रहे थे।

दूत जो साधु के वेश में था बोला, “तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई। तुम धनवान हो गए। परन्तु गरीबों को मत भूल जाना। उनका ध्यान रखना।”

सबसे बड़े भाई को मदिरा के व्यवसाय में लगाकर, साधु दोनों भाइयों के साथ आगे बढ़ चला। वे एक ऐसे बड़े मैदान में पहुंचे जहां कि बहुत-से कबूतर दाना चुग रहे थे।

दूत ने दूसरे भाई से कहा, “मांगो, तुम क्या मांगते हो?”

दूसरे भाई ने उत्तर दिया, “यदि ये कबूतर बदलकर भेड़ हो जाएं और मैं इनका मालिक बन जाऊं, तो इससे सुन्दर और क्या होगा?”

दूत ने पहले की भांति अपनी छड़ी घुमाकर फिर से पहले जैसी रेखाएं बना दीं। सहसा पूरा मैदान भेड़ों से भर गया। घर और दालान बन गए। स्त्रियां भेड़ों को दुहने लगीं और पनीर बनाने लगीं। कुछ लोग बाजार में बेचने के लिए मांस तैयार करने लगे और कुछ उनकी सफाई में लगे हुए थे। वे सभी अपने-अपने कार्य में व्यस्त थे और दूसरे भाई को उन्होंने अपना मालिक समझ लिया था।

दूत ने कहा, “अब तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई। तुम सुखी और सम्पन्न बन गए हो परन्तु निर्धनों का ख्याल रखना ।”

तब दूत और सबसे छोटा भाई वहां से चल दिए। कुछ दूर जाने के पश्चात्‌ दूत ने कहा, “बेटे, तुम भी कुछ मांग लो।”

सबसे छोटे भाई ने चुपके से कहा, “मुझे केवल एक ही चीज चाहिए और वह है एक धर्मपरायण स्त्री।”

दूत ने कहा, “बेटे! तुमने बड़ी कठिन चीज़ मांगी। संसार भर में केवल तीन धर्मपरायण स्त्रियां हैं। उनमें से दो विवाहित हैं। तीसरी राजकुमारी है, जिसके साथ विवाह करने के लिए दो राजा प्रयत्न कर रहे हैं। आओ, हम लोग भी राजा के पास चलें और तुम्हारी इच्छा उनसे कहें।”

अतः वे उस नगर की ओर चल पड़े, जहां राजकुमारी रहती थी लम्बी यात्रा के कारण थके-हारे वे राजमहल में घुसे।

राजा ने उनकी प्रार्थना सुनी | परन्तु जब उसने उनका आने का आशय सुना तो उसने कहा, “मैं कुछ भी निर्णय नहीं कर सकता । दो राजा और यह नवयुवक, तीनों मेरी बेटी से विवाह करने के इच्छुक हैं। क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आता ।”

दूत ने कहा, “ईश्वर ही इसका फैसला करेंगे।”

राजा ने भी कहा, “ठीक है, पर कैसे?”

दूत ने कहा, “अंगूर की लता की तीन डालियां काट लो और उन्हें राजकुमारी को दे दो। राजकुमारी प्रत्येक डाली के ऊपर विवाह के इच्छुक एक-एक प्रत्याशी का नाम लिख-लिखकर तीनों डालियां आज रात बगीचे में गाड़ दे। रात-भर में जिस डाली में फूल खिलकर सुबह अंगूर के गुच्छे नज़र आएं, उसी के साथ राजकुमारी का विवाह कर दें ।”

राजा ने कहा, “यह बहुत अच्छा उपाय है।”

राजकुमारी, दोनों राजकुमार और युवक-तीनों इस उपाय पर राजी हो गए। तीन डालियों पर उनके नाम लिखकर बगीचे में गाड़ दिये गए। प्रातःकाल दो डालियां सूख गईं। तीसरी डाली हरी-भरी थी और उसमें अंगूर के गुच्छे लटक रहे थे। इस डाली पर सबसे छोटे भाई का नाम लिखा हुआ था। राजा को यह शर्त माननी पड़ी। उसे अपनी प्रतिज्ञानुसार राजकुमारी का ब्याह उस युवक से करना पड़ा। राजा ने अपनी लड़की और दामाद को आर्शीवाद दिया।

एक साल के बाद, दूत पुनः पृथ्वी पर यह देखने के लिए आया कि अब वे तीनों भाई कैसे रह रहे हैं। भिखारी बनकर वह सबसे बड़े भाई के पास गया, जो अपने शराब के व्यवसाय में व्यस्त था।

दूत ने कहा, “बाबा, भिखारी को भी एक प्याला शराब दे दो।”

बड़े भाई ने चिल्लाकर कहा, “बदमाश! निकल यहां से! यदि मैं सभी भिखारियों को शराब मुफ्त देता रहूंगा तो खुद भी शीघ्र ही भिखारी बन जाऊंगा ।”

दूत ने अपनी छड़ी घुमाकर क्रॉस का चिन्ह बनाया। चिन्ह बनाते ही शराब की दुकान, गोदाम और काम करने वाले मजदूर-सभी गायब हो गए । वहां पहले की भांति लम्बी-चौड़ी और गहरी नदी बहने लगी।

दूत क्रोधित होकर बोला, “तुम धनवान बनके गरीबों को भूल गए। अतः तुम फिर से जाकर अपने सेब के पेड़ की देखभाल करो ।” फिर दूत दूसरे भाई के पास गया, जो कि दूध तथा भेड़ों के करोबार में लगा हुआ था।

दूत ने गिड़गिड़ाकर कहा, “बाबा, ईश्वर के नाम पर पनीर का एक टुकड़ा दे दो।”

दूसरे भाई ने कहा, “अरे, भाग यहां से, नहीं तो कुत्तों से कटवा दूंगा। तुम्हारे जैसे आलसियों को मैं पनीर नहीं देता ।”

दूत ने पहले की भांति अपनी छड़ी से दो आड़ी-तिरछी लकीरें खींचकर क्रॉस का चिन्ह बनाया। सभी भेड़ें, काम करने वाले मज़दूर आदि सब गायब हो गए और पहले की तरह वहां मैदान हो गया, जहां पर बहुत से कबूतरों का झुंड पहले की भांति ही चुगने लगा था।

दूत क्रोधित होकर बोला, “तुम निर्धनों को भूल गए हो अतः तुम सेब के पेड़ के पास जाकर पहले की भांति ही उसकी रखवाली करो ।”

अब दूत शीघ्रता से जंगल में पहुंचा जहां कि सबसे छोटा भाई अपनी स्त्री के साथ रहता था। वे दोनों एक झोंपड़ी में रहते थे और उन्हें रुपये-पैसे की बड़ी तंगी थी।

दूत जो कि अब भी भिखारी के वेश में था, उनके निकट आकर बोला, “भगवान तुम्हारा भला करे! मुझे खाने को कुछ भोजन और रात के लिए आश्रय मिलेगा?”

सबसे छोटे भाई ने कहा, “हम लोग निर्धन हैं, परन्तु आप यहां रहें और जो कुछ रूखा-सूखा हमारे पास है उससे हम आपकी सेवा करेंगे।”

पति-पत्नी दोनों ने दूत को आग के निकट सर्दी से बचने के लिए स्थान दिया। पत्नी ने रात का भोजन अलग-अलग तीन आदमियों के लिए रखा। वे इतने गरीब थे कि उनके पास आटा तक न था। उन्होंने पेड़ों की छाल को कूटकर, उसके आटे से रोटियां बनाई थीं। उसकी पत्नी शर्म के मारे मरी जा रही थी। उसने कहा, “हम लोग बहुत ही लज्जित हैं। आपको खिलाने के लिए हमारे पास आटे की रोटियां तक भी नहीं हैं।”

दूत हँसता हुआ बोला, “चिंता न करो ।”

छोटे भाई की पत्नी जब भोजन लेने के लिए रसोई में गई, तो देखा कि रोटियां गेहूं के आटे की हो गई हैं। उसके आश्चर्य की सीमा न रही। वह बोली, “भगवान तेरी माया विचित्र है।” खुशी के मारे, उसकी आंखों में आँसू छलछला आये। वह निकट के झरने से एक घड़ा जल ले आयी। जब वह प्यालों में जल उड़ेलने लगी, तो पानी मधुर मदिरा में बदल चुका था। सबसे छोटे भाई को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। परन्तु वह बोला कुछ नहीं।

दूत उनके सत्कार से खुश होकर बोला, “आप लोगों ने गरीबों को नहीं भुलाया। ईश्वर आपका भला करे।”