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Mauritius ki Lok Kathayen-1/ मॉरिशस की लोक कथाएँ-1

जैसी करनी, वैसी भरनी: मॉरिशस की लोक-कथा

एक गांव में रमीना अपने पति व चार बेटों के साथ रहती थी । वह अपने व अपने परिवार के साथ खूब खुशहाल थी । वह मध्यम आय वाला परिवार था । अत: रमीना परिवार की कमाई का अधिकांश भाग बच्चों की शिक्षा पर खर्च करती थी । पिता भी बच्चों को खूब प्यार करता था ।

एक दिन अचानक रमीना का पति बीमार हो गया । डॉक्टरों व वैद्य को दिखाया परंतु उन्हें उसकी बीमारी का पता नहीं लग सका । फिर अचानक उसकी मृत्यु हो गई ।

रमीना जैसे-तैसे अपने बेटों को बड़ा करने लगी । परंतु जैसे-जैसे वे बड़े होते गए उन्हें शहर जाने का भूत सवार होने लगा । धीरे-धीरे वे गांव छोड़कर शहर चले गए । शहर में ही विवाह कर वही रहने लगे ।

रमीना बूढ़ी हो चुकी थी, परंतु उसने हिम्मत नहीं हारी थी । सिलाई-बुनाई का कार्य करके अकेली ही रहती थी और अपने घर का गुजारा चलाती थी । एक दिन वह रसोई में खीर बना रही थी । खीर कई घंटों से पक रही थी । तभी रमीना को थकान महसूस होने लगी । वह रसोई के पास आंगन में चारपाई डालकर उस पर लेट गई ।

रमीना की अचानक आंख लग गई, क्योंकि वह दिन भर की थकी हुई थी । उसके पास घर के नाम पर एक कमरे का किराए का मकान था । उसका अपना मकान कब का बिक चुका था । उसे बेटों से शिकायत थी, परंतु वह कुछ कर नहीं सकती थी ।

उसके चारों बेटे गांव छोड़कर जा चुके थे । उन्हें वहां से गए वर्षों बीत गए थे और वे गांव के बारे में सब कुछ भूल चुके थे । परंतु वे वहां जाकर बेईमान बन गए थे ।

चारों बेटे मिलकर घरों में चोरी करते थे, फिर माल बांट कर उसी से अपने परिवार का गुजारा करते थे । उन्हें न तो मां की फिक्र थी, न ही कोई सुध । मां का क्या हाल होगा, यह वे नहीं जानना चाहते थे ।

चारों बेटे चोरी में इतने माहिर हो चुके थे कि वे कभी पकड़े न जाते थे । एक दिन उन्होंने एक सर्राफ के यहां चोरी की और खूब मालामाल हो गए ।

लेकिन चोर को तो चोरी के सिवा कुछ करना आता ही नहीं है अत: वे आलसी बनकर उस माल पर ऐश करने लगे । कुछ ही दिनों में सारा धन और माल समाप्त हो गया । अब उन्हें फिर से धन पाने की चिंता सताने लगी ।

एक दिन वे चोरी के इरादे से शाम को घर से निकले । तभी उन्हें एक युवक मिला । वह बोला – “तुम कहां जा रहे हो, मुझे भी साथ ले लो ।”

चारों ने उसे इन्कार कर दिया । परंतु वह युवक उनकी खुशामद करने लगा और बोला, “अच्छा भैया, तुम यह बता दो कि तुम कहां जा रहे हो ?”

एक बेटा क्रोधित होकर बोला – “चोरी करने, चलोगे ?”

“हां भैया, सब कुछ करूंगा । मैंने 5 दिन से खाना नहीं खाया है, जैसा कहोगे वैसा ही करूंगा । जो दोगे वही ले लूंगा । अपना हिस्सा भी नहीं मागूंगा ।”

चारों भाइयों को बात जंच गई कि मुफ्त में नौकर मिल रहा है जो चोरी में भी साथ देने को तैयार है । फिर वह अपना हिस्सा भी नहीं मांगेगा । उन्होंने युवक को साथ ले लिया, परंतु उसे समझाया – “देखो, तुम पहली बार चोरी करने जा रहे हो, अत: कोई बेवकूफी मत करना ।”

युवक तैयार हो गया और उन चारों के साथ चल दिया । चारों भाई चोरी के लिए मकान तलाश करने लगे । उन्होंने कई मकानों में घुसने का प्रयास किया परंतु हर घर में कोई न कोई जाग रहा था । अचानक उन्हें एक घर का दरवाजा खुला दिखाई दिया, वे उसमें घुस गए । वहां उन्होंने खूब जमकर चोरी की । घर का हर सामान एक चादर में बांध लिया, हालांकि घर में कोई भी कीमती सामान न था । परंतु वे चोरी करने निकले थे तो उन्हें कुछ न कुछ तो चुराना ही था ।

तभी एक बेटे की रसोई की ओर नजर गई । वहां खीर पक रही थी चारों को लगा कि चलने से पहले गर्मागर्म खीर का मजा ले लेना चाहिए ।

पांचों लोग खीर खाने में व्यस्त थे, तभी उनकी निगाह आंगन में सोई बुढ़िया की ओर गई ।

चारों बेटे अपनी मां को पहचान न सके, क्योंकि इतने वर्षों में वह बूढ़ी हो चुकी थी । नया चोर युवक बोला – “भैया, यह बुढ़िया कैसे हाथ पसारे सो रही है । लगता है कि यह कह रही है कि सारी खीर अकेले खा जाओगे, मुझे नहीं खिलाओगे ।”

दूसरा बोला – “हां, और क्या, यह अपने लिए खीर पका रही है और हमने खत्म कर दी तो यह क्या खाएगी ?”

तभी युवक तेजी से उठा और एक चम्मच खीर बुढ़िया के हाथ पर रख दी । गर्म खीर हाथ पर रखते ही बुढ़िया चिल्लाते हुए उठ बैठी । वह चिल्लाई – “बचाओ, मैं मर गई ।”

उसकी आवाज सुनकर पांचों चोर घर के अलग-अलग कोनों में छिप गए । रमीना के चिल्लाने से बहुत सारे पड़ोसी दौड़े आए और पूछने लगे कि क्या हुआ । वह क्यों चिल्ला रही थी ।

अचानक हाथ पर गर्म खीर रखने से और भीड़ इकट्ठी होने से रमीना कुछ समझ ही न सकी कि क्या हुआ । वह नींद में थी । तभी एक पड़ोसी ने पूछा – “अम्मां क्या हुआ ?”

रमीना बोली – “पता नहीं क्या हुआ, मैं तो सो रही थी । यह खीर मेरे हाथ पर कहां से आई, यह तो ऊपर वाला ही जाने ।”

सभी चोर अलग कोनों में छिपे बुढ़िया की बातें सुन रहे थे और घबरा रहे थे कि वे कहीं पकड़े न जाएं । युवक, जो नया चोर था और पहली बार चोरी करने निकला था, इत्तेफाक से ऊपर छत के किनारे छिपा बैठा था । रमीना की बात सुन कर उसे यूं लगा कि बुढ़िया ने उसे देख लिया है तभी कह रही है कि ऊपर वाला जाने । वह ऊपर छिपे-छिपे ही जोर से बोला – “मैं क्या जानूं, यह तो बाथरूम वाला जाने कि क्या हुआ ।”

युवक की बात सुनकर बाथरूम में छिपा चोर घबरा गया कि वह पकड़ा जाएगा तो उसकी पिटाई होगी, वह स्वयं को बचाने के प्रयास में बोला – “मैं क्या जानूं, चारपाई के पीछे वाला जाने ।”

तभी चारपाई के पीछे वाला बोल उठा – वाह ! मुझे क्यों फंसा रहे हो, मैं क्या जानूं सीढ़ियों वाला जानता है कि क्या हुआ ।”

सीढ़ियों वाले ने भी तुरंत इसी तरह चिल्लाकर कहा – “मुझे क्यों फंसाते हो, मैं क्या जानूं कि क्या हुआ, यह तो बिस्तर के पीछे वाला जानता है ।”

सारे अड़ोसी-पड़ोसी व रमीना हैरान थे कि आवाज कहां-कहां से आ रही है । वे सब एक साथ झपट पड़े और पांचों चोरों को पकड़ लिया ।

पांचों चोरों को जेल में डाल दिया गया । वहां पुलिस ने उनका अता-पता पूछा तो पता लगा कि उनमें से चार चोर तो रमीना के ही बेटे थे । चारों ने बहुत मिन्नत कि उन्हें बख्श दिया जाए, परंतु रमीना ने कहा – “मैं बचाने वाली कौन होती हूं । जैसी करनी, वैसी भरनी ।”

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Mauritius ki Lok Kathayen-2/ मॉरिशस की लोक कथाएँ-2

सीत-बसन्त: मॉरिशस की लोक-कथा

यह कहानी दो शिशुओं पर आधारित है । एक का नाम था सीत और दूसरे का बसन्त । दोनों भाई और बहन थे ।

एक समय की बात है । एक नगर के वासी बहुत प्रसन्न थे । न कोई भूखा और न कोई प्यासा था । वहाँ हर प्रकार की सुख-सुविधा थी। किन्तु महल में कोई खुशहाली न थी । रानी की गोद बरसों बाद भी भारी न हुई । प्रजा से राजा का दुख देखा न गया । उनके अनुरोध पर राजा ने दूसरी शादी की, फिर भी राजा की आस पूरी न हुई । वंश और कूल को बढ़ाने के लिए राजा ने सात शादियाँ कीं । तब जाकर सातवीं रानी से राजा की इच्छा दुगनी पूरी हो गई । रानी ने एक पुत्र और एक बेटी को जन्म दिया । रानी के दो बच्चे जैसे हीरे के दो टुकड़े थे । राजा के दोनों कलेजे के टुकड़े थे । रानी भी राजा से अपार प्रेम करते थे ।

परन्तु उन छ: रानियों से उनका सुख देखा न गया । ऐसा लगता था जैसे उनके कलेजे में साँप लोट रहा हो । छ: रानियों को कलियों का खिलना रास न आया । एक दूसरे से सलाह कर, उन्होंने एक व्यक्ति को स्वर्णमुद्राएँ और माला का लोभ दिया । वह व्यक्ति बच्चों को जंगल में ले गया और वहीं उनकी हत्या कर ज़मीन में उनकी लाश गाड़ दी ।

मृत्यु शैया के पास घाटी से दो कमल फूल खिले । उन फूलों पर सबसे पहले एक लकड़हारे की दृष्टि पड़ी । वह उन फूलों को तोड़कर राजा को भेंट करना चाहता था । किन्तु ज्योंही वह फूल तोड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाता, फूल अदृश्य हो जाता । उसने राजा के पास जाकर इस अद्भूत घटना का वर्णन किया । किसी को भी इस बात का विश्वास नहीं हुया । जादू के फूल तोड़ने केलिए पहले मंत्री गया, फिर सेनापति । उनके पास जाते ही फूल डालें पाते आकाश में लग जाते ।

वे दोनों पुष्प और कोई न थे, वे सीत और बसन्त थे । उन्हें अपनी माँ का इन्तज़ार था । राजा ने उनकी माँ को गलत समझकर त्याग दिया था इसलिए राजा उनकी नज़रों में दोषी थे । जब सभी असमर्थ होकर लौटे तो राजा ने राज ज्योतिषी को भेजा । ज्योतिषी बड़ा अहंकारी था क्योंकि उनकी हर भविष्यवाणी सत्य प्रमाणित हुई थी । बच्चों ने उसका अभिमान तोड़ने की सोची । ज्योंही वह आगे बढ़ता, फूल आँखों से ओझल हो जाते । ज्योतिषी क्रोधित होकर, तांत्रिक विद्या द्वारा फूलों को बन्दी बनाकर राजा के पास ले जाना चाहता था ।

तब सीत और बसन्त ने बताया कि जिस महाराज को वे वीर और प्रतापी मानते हैं, उन्होंने अपनी निर्दोष छोटी रानी को महल से निकाल दिया है । ज्योतिषी राजा के पक्ष में कहा कि रानी लापरवाही न करती तो बच्चे गायब न होते । तब सीत और बसन्त ने ज्योतिषी को राजा की छहों रानियों के कुचक्र के बारे में बताया । किस तरह उन्होंने छोटी रानी से ईर्ष्यावश बच्चों की हत्या करवाई । ज्योतिषी को जब पता चला कि जिस जगह वह खड़ा था, उन मासूम बच्चों की हत्या हुई थी तो उसे बड़ा दुख हुआ । पूरे राज्य की ओर से उसने दोनों से क्षमा माँगी ।

सीत और बसन्त अपनी माँ का पता जानने के लिए व्याकुल थे किन्तु किसी को भी पता न था कि रानी राजमहल से कहाँ गई । इधर महाराज को एक अद्भूत स्वप्न आया जिसमें एक लड़का और एक लड़की उनसे कठोर स्वर में बातें कर रहे थे । वे राजा से कह रहे थे कि उन्हें न राजा का धर्म और न पिता का धर्म निभाना आता है । राजा को अपनी गलती का अहसास हुया । वे सोचने लगे , कहीं छोटी रानी के साथ धोखा तो नहीं हुआ । दूसरे दिन महल में माली ने भी आकर राजा से फूलों का अलौकिक वर्णन किया ।

महाराज ने सभा बुलाकर उस गंभीर समस्या पर विचार किया । ज्योतिषी ने महाराज को सुझाव दिया कि महारानी को भेजना अत्युत्तम होगा क्योंकि स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से अपनापन होता है । सभासदों के परामर्श पर महारानी को जंगल भेजा गया । महारानी के दिल में खोट थी । फूलों के पास जाने पर उनका कठोर दिल काँपने लगा । डर कर वह वापस लौट आई । राजा बीमार पड़ गये । वे स्वयं जाने के लिए तैयार हुए ।

राज-रथ आते देख सीत और बसन्त आपस में बात करने लगे । सीत ने कहा कि भाई-बहन का रिश्ता उन्हें कई जन्मों के पुण्य से मिला है । तब बसन्त को उस शाप की याद आई जो एक ऋषि ने उनके भाई-बहन के प्यार को देख कर ईर्ष्यावश दिया था । शाप में उनकी हत्या होनी थी और उनकी माँ को अकारण दण्ड मिलना था । बाद में ऋषि को पछतावा हुआ था । उन्होंने कहा कि उनकी बिछड़ी हुई माँ मिल जायेगी ।

राजा जब समीप आए तो उन अद्भूत और विशेष फूलों को देख प्रसन्न हुए । उन्हें भी फूल प्राप्त करने की इच्छा हुई । उन्हें तोड़ने के लिए हाथ बढ़ाए वे विस्मयकारी ढंग से आकाश में उड़ गए । राजा को अपनी गलती का अनुमान हो चुका था । फूलों के रहस्य को सुलझाने से पहले वे धरती से जाना नहीं चाहते थे इसलिए वे अपने राजमहल वापस लौट आये ।

ऋषि के शाप के टलने का समय आ चुका था । निर्दय रानियों के बुरे दिन आ गये थे । ज्योतिषी ने महाराज से छोटी रानी की तलाश का निवेदन कया । छोटी रानी को फूलों के पास भेजने से ही उनका रहस्य खुल सकता था । ढूंढने पर पता चला कि रानी सोनपुर ज़मींदार के यहाँ कौआ हँकनी के रूप में काम कर रही है । उन्हें महल में लाया गया । रानी का दम महल में घुट रहा था । वह जंगल में लौट जाना चाहती थी । राजा ने अपना अपराध स्वीकार कया । रानी को अपने बच्चों की याद दिलाई ।

तब रानी साधारण कपड़ों में जंगल की ओर प्रस्थान कर गई । उन्हें सोना-चांदी, महल, राज-सम्मान का मोह न था । उन्हें सिर्फ सीत-बसन्त की चाह थी । वह नंगे पांव दिल में आस लिए जंगल की ओर चल पड़ी । सीत और बसन्त माँ को आते देख खुश होकर उनके गले मिले । रानी की ममता की जीत हुई ।

माँ से मिलने के बाद वे महल लौटना नहीं चाहते थे । माँ ने कहा कि दुनिया को सच्चाई बताने के लिए उन्हें महल वापस जाना होगा । रानी को खुशी हुई जब महाराज ने सीत और बसन्त को पहचान लिया । राजा की खुशी का ठिकाना न था । उन्होंने जो खोया था, पूरा पा लिया । छोटी रानी का दम महल में घुट रहा था । उसने महाराज से आज्ञा मांगी । महाराज ने छोटी रानी को राजमहल, राजगद्दी के उत्तराधिकारी का वास्ता दिया । बसन्त अपनी माँ के अलावा और कुछ नहीं चाहता था । महाराज हर तरह से प्रायश्चित करने के लिए तैयार थे । उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों से कहा कि यदि वे चले गये तो वे आत्महत्या कर लेंगे । इस पर बच्चों का दिल पिघल गया । उनके मिलने पर चारों तरफ खुशहाली छा गई ।

महाराज हर प्राणी को जिन्होंने यह काण्ड रचा था, दण्ड देना चाहते थे । छोटी रानी उन सब को क्षमा दान देना चाहती थी । किन्तु महाराज के लिए वे क्षमा योग्य नहीं थे । राजा उन्हें ऐसी सज़ा दिलाना चाहते थे जिससे देखने और सुनने वालों का दिल दहल जाए । वे राज्य के हर प्राणी को सुखी देखना चाहते थे । सबका साथ पाकर महाराज ने राज ज्योतिषी द्वारा गायक बुलवाए और खुशी के गीत से पूरा वातावरण गूंज उठा ।