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स्विट्ज़रलैंड की लोक कथाएँ-1 Switzerland ki lok kathayen-1

टॉम और सौतेली मां: स्विट्ज़रलैंड की लोक-कथा

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बहुत समय पहले की बात है, एक शहर में एक आदमी रहता था। कुछ समय बाद उसकी पत्नी की मृत्यु हो गयी। उसकी एक बेटी थी जिसका नाम टॉम था। पिता और बेटी दोनों आराम से रहते थे।
एक दिन उस आदमी ने दूसरी शादी करने का फैसला किया। उसकी शादी तो हो गई लेकिन उसकी दूसरी पत्नी बहुत चालाक निकली | कुछ ही दिनों में सौतेली मां ने टॉम के साथ बुरा बर्ताव करना शुरू कर दिया। वह टॉम से सारा दिन काम करवाती और एक पल के लिए भी उसे खाली नहीं बैठने देती थी। इस पर भी कई बार वह टॉम को खाना न देती और वह बेचारी बिना कुछ बोले भूखी सो जाती।
इधर टॉम की सौतेली मां के घर एक पुत्री ने जन्म लिया। उसका नाम “काम” रखा गया। टॉम अपनी छोटी बहन से बहुत प्रेम करती थी। पर उसकी मां को यह भी अच्छा नहीं लगता था। वह जब टॉम को अपनी बेटी काम के साथ बैठे देखती, वह उसे गुस्से में कहती, “जाओ यहां से, सुबह से यहां बैठी क्या कर रही हो?”
कुछ दिनों बाद टॉम के पिता की मृत्यु हो गयी। अब तो उसकी मां का व्यवहार और भी खराब हो गया।
टॉम को इतने बड़े घर में रसोईघर के साथ वाला एक गन्दा-सा कमरा मिला हुआ था। वह वहीं उठती-बैठती और वहीं सोती। उसे दूसरे कमरों में जाने की मनाही थी। बस सफाई करने के लिए वह वहां जा सकती थी।
टॉम को बहुत काम करना पड़ता था। सारे घर की सफाई करती, कपड़े साफ करती, फर्श रगड़ कर धोती और सारे घर का भोजन बनाती । भैंस को नहलाना, चारा डालना, लकड़ी काटना, कुएं से पानी लाना जैसे बहुत से काम उस छोटी सी लड़की को करने पड़ते। काम करते-करते कई बार तो वह बहुत थक जाती, लेकिन किसी से शिकायत न करती।